
अवैध हथियार रखने का शौक बढ़ रहा अपराध का ग्राफ, तह तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस
अवैध हथियार रखने का शौक बढ़ रहा अपराध का ग्राफ, तह तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस
-बीते साढ़े चार साल में 651 दर्ज मामलों में 670 जनों की हो चुकी है गिरफ्तारी
-बजरी माफिया करते है अवैध हथियारों का प्रयोग
धौलपुर. जिले में अपराधिक वारदातें हो य पुलिस पर हमलों से जुड़ा मामला अधिकांश में अवैध हथियारों के उपयोग होना उजागर तो हो चुका है, ऐसे में अवैध हथियार रखने वालों को भी गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अभी तक अवैध हथियारों को लेकर किसी भी तह तक नहीं पहुंच सकी है। आलम यह है कि अवैध हथियारों के बढ़ते कारोबार के कारण जिले में अपराधों के ग्राफ में भी बढ़ोतरी हुई है। अवैध हथियार रखने के मामले में प्रतिबंधित बजरी परिवहन से जुड़े लोग सबसे आगे हैं। यह आंकड़े पुलिस थानों में दर्ज हुए अवैध हथियारों के केसों से सामने आए है। अवैध हथियारों के बढ़ते प्रचलन के चलते क्राइम कंट्रोल के लिए पुलिस प्रशासन ने कोई खास रणनीति भी तैयार नहीं की है। ऐसे में जिले में अवैध हथियार से फायरिंग की वारदातें होना आम होने लगा है। हाल में कोतवाली थाना इलाके में बजरी माफियाओं की ओर पुलिस की गई फायरिंग में अवैध देसी कट्टे का इस्तेमाल किया गया। राजाखेड़ा क्षेत्र में एक युवक ने स्वयं को देसी कट्टे से गोली मारकर आत्महत्या की घटना सामने आई है।
उल्लेखनीय है कि चंबल क्षेत्र के धौलपुर में अवैध हथियारों का क्रेज खत्म नहीं हो पा रहा है। प्रदेश के छोटे जिले में शुमार धौलपुर में ही करीब साढ़े तीन हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंसी हैं। यह स्थिति तब है, जब पिछले पांच साल से प्रशासन ने नए लाइसेंस देने की प्रक्रिया को जटिल कर दिया है। ऐसे में अब क्षेत्र का युवा वर्ग अवैध हथियार रखने की शौकीन होती जा रही है। बजरी माफियाओं की ओर से पुलिस पर फायरिंग की घटनाओं में अवैध देसी कट्टों से फायरिंग किए जाने की बात भी कई बार सामने आ चुकी है। इसके अलावा यह भी सबके सामने आ चुका है कि प्रतिबंधित बजरी का परिवहन करने वालों की ओर से देसी कट्टों का इस्तेमाल कर रहे है। ऐसे में जिले के आमरास्तों से जब प्रतिबंधित बजरी के वाहनों का आवागमन होता है तो पुलिस हमला होने के भय से इनके आगे आने से कतरा रही है।
देशी कट्टा रखने का प्रचलन
सूत्रों का कहना है कि धौलपुर जिले में अवैध हथियारों में सबसे अधिक कट्टा प्रचलित है। इनकी खेप समीपवर्ती मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश क्षेत्र के जिलों से आ रही है। इसके अलावा उप्र से जुड़े बॉर्डर के दूसरे गांवों से भी आदान-प्रदान होता रहता है। आंकडों पर नजर डाले तो जिलेभर में अधिकांश अपराधिक वारदातों में देशी कट्टे का ही प्रयोग किया गया है। इसके अलावा गत वर्ष सदर थाना इलाके के गांव मियां का पुरा में दो पक्षों के मध्य हुए खूनी संघर्ष में पांच जनों की हत्या की वारदात में भी देशी कट्टों का प्रयोग किया गया था। इसके अलावा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी झगड़े के दौरान कई बार अवैध हथियारों से फायरिंग की वारदातें भी होने की बात सामने आ चुकी है।
अवैध हथियारों की तह तक नहीं पहुंच
कहने को जिले बीते साढ़े चार साल में जिले के विभिन्न थानों पर 651 मामले दर्ज करते हुए 670 जनों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन जिला पुलिस अभी तक ऐसे किसी बड़े हथियार तस्कर को नहीं पकड़ सकी, जो कि जिले में हथियारों की सलाई करता है। पुलिस का हथियार तस्करों तक नहीं पहुंच पाना अवैध हथियार रखने के प्रचलन को बढ़ावा दे रहा है।
अवैध हथियार तस्करों को चिन्हित करने के पुलिस के प्रयास जारी है, जिले पुलिस अभियान चलाकर हथियार तस्करों को चिन्हित करेंगी।
वचन सिंह मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, धौलपुर।
Published on:
09 Sept 2020 05:21 pm
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