scriptचंबल का सीना छलनी कर रहे बजरी माफिया, जिम्मेदार चुप......देखें तस्वीरें |The gravel mafia is piercing Chambal's chest, responsible silent...... | Patrika News
धौलपुर
चंबल का सीना छलनी कर रहे बजरी माफिया, जिम्मेदार चुप......देखें तस्वीरें
7 Photos
Published: February 01, 2022 07:25:21 pm
1/7

धौलपुर. प्रसिद्ध फिल्म एनएच10 का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इस हाइवे से उतरते ही एक अलग दुनिया है, जहां कानून का नहीं जंगल का राज चलता है।’ यह संवाद धौलपुर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन के संबंध में भी यह संवाद सटीक बैठता है। चंबल पुल को पार करते ही मध्यप्रदेश सीमा में ‘जंगल का राज’ साफ दिखाई भी देता है। यहां राजघाट पर प्रतिबंधित चंबल घडिय़ाल क्षेत्र में चंबल का सीना चीर रेता का अवैध उत्खनन जारी है। यहां एक या दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉली रेता भरकर ले जाया जा रहा है। यहां तक कि बजरी माफिया ने जेसीबी और हाइड्रा जैसी आधुनिक मशीनें भी रेता उत्खनन में लगी रखी हैं। बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घडिय़ालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है। यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है, इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है। इसके बावजूद सालाना करोड़ों रुपए की रेत निकालकर वर्षों से चंबल की छाती छलनी की जा रही है। लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार भी बदलीं, लेकिन रेत की लूट जारी है। हाथ पर हाथ धरे बैठी दोनों राज्यों की पुलिसअवैध रेत के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली राजघाट से चंद कदम दूर मध्यप्रदेश की अल्लाबेली पुलिस चौकी और धौलपुर में सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि इन्हें रोक कर जब्त करे, लेकिन पुलिस जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उसके बाद यह ट्रेक्टर मुरैना व अन्य जिलों के लिए नेशनल हाईवे से होकर निकल जाते हैं। चंबल के राजघाट पुल से खनन होने वाले लगभग 70 प्रतिशत रेत की सप्लाई राजस्थान के धौलपुर में होती है।

2/7

धौलपुर. प्रसिद्ध फिल्म एनएच10 का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इस हाइवे से उतरते ही एक अलग दुनिया है, जहां कानून का नहीं जंगल का राज चलता है।’ यह संवाद धौलपुर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन के संबंध में भी यह संवाद सटीक बैठता है। चंबल पुल को पार करते ही मध्यप्रदेश सीमा में ‘जंगल का राज’ साफ दिखाई भी देता है। यहां राजघाट पर प्रतिबंधित चंबल घडिय़ाल क्षेत्र में चंबल का सीना चीर रेता का अवैध उत्खनन जारी है। यहां एक या दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉली रेता भरकर ले जाया जा रहा है। यहां तक कि बजरी माफिया ने जेसीबी और हाइड्रा जैसी आधुनिक मशीनें भी रेता उत्खनन में लगी रखी हैं। बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घडिय़ालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है। यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है, इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है। इसके बावजूद सालाना करोड़ों रुपए की रेत निकालकर वर्षों से चंबल की छाती छलनी की जा रही है। लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार भी बदलीं, लेकिन रेत की लूट जारी है। हाथ पर हाथ धरे बैठी दोनों राज्यों की पुलिसअवैध रेत के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली राजघाट से चंद कदम दूर मध्यप्रदेश की अल्लाबेली पुलिस चौकी और धौलपुर में सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि इन्हें रोक कर जब्त करे, लेकिन पुलिस जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उसके बाद यह ट्रेक्टर मुरैना व अन्य जिलों के लिए नेशनल हाईवे से होकर निकल जाते हैं। चंबल के राजघाट पुल से खनन होने वाले लगभग 70 प्रतिशत रेत की सप्लाई राजस्थान के धौलपुर में होती है।

3/7

धौलपुर. प्रसिद्ध फिल्म एनएच10 का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इस हाइवे से उतरते ही एक अलग दुनिया है, जहां कानून का नहीं जंगल का राज चलता है।’ यह संवाद धौलपुर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन के संबंध में भी यह संवाद सटीक बैठता है। चंबल पुल को पार करते ही मध्यप्रदेश सीमा में ‘जंगल का राज’ साफ दिखाई भी देता है। यहां राजघाट पर प्रतिबंधित चंबल घडिय़ाल क्षेत्र में चंबल का सीना चीर रेता का अवैध उत्खनन जारी है। यहां एक या दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉली रेता भरकर ले जाया जा रहा है। यहां तक कि बजरी माफिया ने जेसीबी और हाइड्रा जैसी आधुनिक मशीनें भी रेता उत्खनन में लगी रखी हैं। बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घडिय़ालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है। यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है, इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है। इसके बावजूद सालाना करोड़ों रुपए की रेत निकालकर वर्षों से चंबल की छाती छलनी की जा रही है। लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार भी बदलीं, लेकिन रेत की लूट जारी है। हाथ पर हाथ धरे बैठी दोनों राज्यों की पुलिसअवैध रेत के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली राजघाट से चंद कदम दूर मध्यप्रदेश की अल्लाबेली पुलिस चौकी और धौलपुर में सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि इन्हें रोक कर जब्त करे, लेकिन पुलिस जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उसके बाद यह ट्रेक्टर मुरैना व अन्य जिलों के लिए नेशनल हाईवे से होकर निकल जाते हैं। चंबल के राजघाट पुल से खनन होने वाले लगभग 70 प्रतिशत रेत की सप्लाई राजस्थान के धौलपुर में होती है।

4/7

धौलपुर. प्रसिद्ध फिल्म एनएच10 का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इस हाइवे से उतरते ही एक अलग दुनिया है, जहां कानून का नहीं जंगल का राज चलता है।’ यह संवाद धौलपुर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन के संबंध में भी यह संवाद सटीक बैठता है। चंबल पुल को पार करते ही मध्यप्रदेश सीमा में ‘जंगल का राज’ साफ दिखाई भी देता है। यहां राजघाट पर प्रतिबंधित चंबल घडिय़ाल क्षेत्र में चंबल का सीना चीर रेता का अवैध उत्खनन जारी है। यहां एक या दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉली रेता भरकर ले जाया जा रहा है। यहां तक कि बजरी माफिया ने जेसीबी और हाइड्रा जैसी आधुनिक मशीनें भी रेता उत्खनन में लगी रखी हैं। बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घडिय़ालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है। यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है, इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है। इसके बावजूद सालाना करोड़ों रुपए की रेत निकालकर वर्षों से चंबल की छाती छलनी की जा रही है। लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार भी बदलीं, लेकिन रेत की लूट जारी है। हाथ पर हाथ धरे बैठी दोनों राज्यों की पुलिसअवैध रेत के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली राजघाट से चंद कदम दूर मध्यप्रदेश की अल्लाबेली पुलिस चौकी और धौलपुर में सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि इन्हें रोक कर जब्त करे, लेकिन पुलिस जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उसके बाद यह ट्रेक्टर मुरैना व अन्य जिलों के लिए नेशनल हाईवे से होकर निकल जाते हैं। चंबल के राजघाट पुल से खनन होने वाले लगभग 70 प्रतिशत रेत की सप्लाई राजस्थान के धौलपुर में होती है।

5/7

धौलपुर. प्रसिद्ध फिल्म एनएच10 का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इस हाइवे से उतरते ही एक अलग दुनिया है, जहां कानून का नहीं जंगल का राज चलता है।’ यह संवाद धौलपुर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन के संबंध में भी यह संवाद सटीक बैठता है। चंबल पुल को पार करते ही मध्यप्रदेश सीमा में ‘जंगल का राज’ साफ दिखाई भी देता है। यहां राजघाट पर प्रतिबंधित चंबल घडिय़ाल क्षेत्र में चंबल का सीना चीर रेता का अवैध उत्खनन जारी है। यहां एक या दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉली रेता भरकर ले जाया जा रहा है। यहां तक कि बजरी माफिया ने जेसीबी और हाइड्रा जैसी आधुनिक मशीनें भी रेता उत्खनन में लगी रखी हैं। बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घडिय़ालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है। यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है, इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है। इसके बावजूद सालाना करोड़ों रुपए की रेत निकालकर वर्षों से चंबल की छाती छलनी की जा रही है। लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार भी बदलीं, लेकिन रेत की लूट जारी है। हाथ पर हाथ धरे बैठी दोनों राज्यों की पुलिसअवैध रेत के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली राजघाट से चंद कदम दूर मध्यप्रदेश की अल्लाबेली पुलिस चौकी और धौलपुर में सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि इन्हें रोक कर जब्त करे, लेकिन पुलिस जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उसके बाद यह ट्रेक्टर मुरैना व अन्य जिलों के लिए नेशनल हाईवे से होकर निकल जाते हैं। चंबल के राजघाट पुल से खनन होने वाले लगभग 70 प्रतिशत रेत की सप्लाई राजस्थान के धौलपुर में होती है।

6/7

धौलपुर. प्रसिद्ध फिल्म एनएच10 का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इस हाइवे से उतरते ही एक अलग दुनिया है, जहां कानून का नहीं जंगल का राज चलता है।’ यह संवाद धौलपुर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन के संबंध में भी यह संवाद सटीक बैठता है। चंबल पुल को पार करते ही मध्यप्रदेश सीमा में ‘जंगल का राज’ साफ दिखाई भी देता है। यहां राजघाट पर प्रतिबंधित चंबल घडिय़ाल क्षेत्र में चंबल का सीना चीर रेता का अवैध उत्खनन जारी है। यहां एक या दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉली रेता भरकर ले जाया जा रहा है। यहां तक कि बजरी माफिया ने जेसीबी और हाइड्रा जैसी आधुनिक मशीनें भी रेता उत्खनन में लगी रखी हैं। बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घडिय़ालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है। यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है, इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है। इसके बावजूद सालाना करोड़ों रुपए की रेत निकालकर वर्षों से चंबल की छाती छलनी की जा रही है। लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार भी बदलीं, लेकिन रेत की लूट जारी है। हाथ पर हाथ धरे बैठी दोनों राज्यों की पुलिसअवैध रेत के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली राजघाट से चंद कदम दूर मध्यप्रदेश की अल्लाबेली पुलिस चौकी और धौलपुर में सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि इन्हें रोक कर जब्त करे, लेकिन पुलिस जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उसके बाद यह ट्रेक्टर मुरैना व अन्य जिलों के लिए नेशनल हाईवे से होकर निकल जाते हैं। चंबल के राजघाट पुल से खनन होने वाले लगभग 70 प्रतिशत रेत की सप्लाई राजस्थान के धौलपुर में होती है।

7/7

धौलपुर. प्रसिद्ध फिल्म एनएच10 का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इस हाइवे से उतरते ही एक अलग दुनिया है, जहां कानून का नहीं जंगल का राज चलता है।’ यह संवाद धौलपुर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या तीन के संबंध में भी यह संवाद सटीक बैठता है। चंबल पुल को पार करते ही मध्यप्रदेश सीमा में ‘जंगल का राज’ साफ दिखाई भी देता है। यहां राजघाट पर प्रतिबंधित चंबल घडिय़ाल क्षेत्र में चंबल का सीना चीर रेता का अवैध उत्खनन जारी है। यहां एक या दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेक्टर-ट्रॉली रेता भरकर ले जाया जा रहा है। यहां तक कि बजरी माफिया ने जेसीबी और हाइड्रा जैसी आधुनिक मशीनें भी रेता उत्खनन में लगी रखी हैं। बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घडिय़ालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है। यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है, इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है। इसके बावजूद सालाना करोड़ों रुपए की रेत निकालकर वर्षों से चंबल की छाती छलनी की जा रही है। लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार भी बदलीं, लेकिन रेत की लूट जारी है। हाथ पर हाथ धरे बैठी दोनों राज्यों की पुलिसअवैध रेत के भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली राजघाट से चंद कदम दूर मध्यप्रदेश की अल्लाबेली पुलिस चौकी और धौलपुर में सागरपाड़ा पुलिस चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि इन्हें रोक कर जब्त करे, लेकिन पुलिस जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। उसके बाद यह ट्रेक्टर मुरैना व अन्य जिलों के लिए नेशनल हाईवे से होकर निकल जाते हैं। चंबल के राजघाट पुल से खनन होने वाले लगभग 70 प्रतिशत रेत की सप्लाई राजस्थान के धौलपुर में होती है।

अगली गैलरी
सीवरेज लाइन की खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने से दबे श्रमिकों को कैसे निकाला बाहर ...देखें तस्वीरें
next
loader

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

बुध जल्द वृषभ राशि में होंगे मार्गी, इन 4 राशियों के लिए बेहद शुभ समय, बनेगा हर कामज्योतिष: रूठे हुए भाग्य का फिर से पाना है साथ तो करें ये 3 आसन से कामजून का महीना किन 4 राशियों की चमकाएगा किस्मत और धन-धान्य के खोलेगा मार्ग, जानेंमान्यता- इस एक मंत्र के हर अक्षर में छुपा है ऐश्वर्य, समृद्धि और निरोगी काया प्राप्ति का राजराजस्थान में देर रात उत्पात मचा सकता है अंधड़, ओलावृष्टि की भी संभावनाVeer Mahan जिसनें WWE में मचा दिया है कोहराम, क्या बनेंगे भारत के तीसरे WWE चैंपियनफटाफट बनवा लीजिए घर, कम हो गए सरिया के दाम, जानिए बिल्डिंग मटेरियल के नए रेटशादी के 3 दिन बाद तक दूल्हा-दुल्हन नहीं जा सकते टॉयलेट! वजह जानकर हैरान हो जाएंगे आप

बड़ी खबरें

पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात, लाखों समर्थकों संग डी-चौक पहुंचे इमरान खान, लोगों ने फूंका मेट्रो स्टेशन, राजधानी में सड़कों पर सेनाउद्धव के एक और मंत्री पर ED का शिकंजा, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री अनिल परब के घर प्रवर्तन निदेशालय का छापाKashmir On Alert: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में लश्कर के 3 आतंकी ढेर, सभी सशस्त्र बलों की छुट्टियाँ रद्दBy election in Five States: पांच राज्यों की तीन लोकसभा और सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान, इस दिन होगी वोटिंगUP Budget 2022 Live : योगी कैबिनेट की बैठक में बजट प्रस्ताव को मंजूरीदिल्ली के नए उपराज्यपाल विनय सक्सेना आज संभालेंगे पद, सामने होंगी बड़ी चुनौतियांभारतीयों से कभी नहीं मांगेंगे रहम की भीख, आजादी के लिए संघर्ष जारी रहेगा: यासीन मलिक की पत्नी के 'आतंकी' बोलयासीन मलिक ने किया आइडिया ऑफ इंडिया पर हमला, महात्मा गांधी से तुलना करने पर भड़के जज
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.