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धौलपुर खंड में साल दर साल बढ़ रही ट्रेन से हताहत होने वालों की संख्या, तीन साल में 31 लोगों ने गंवाई जान

.आगरा रेलवे मंडल के धौलपुर खंड में ट्रेन से हताहत होने वालों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। पिछले 3 सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो 3१ लोग ट्रेन की चपेट में आने और गिरकर अपनी जान गवा चुके हैं। जिनमें से 26 मृत लोगों की पहचान की गई तो ५ मृत व्यक्ति अज्ञात रहे। जिनका धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। इसके अलावा लगभग 120 व्यक्ति घायल भी हुए।आगरा रेलवे मंडल का धौलपुर खंड 22 किलोमीटर तक का है और इस खंड से प्रतिदिन150के आसपास ट्रेनों का आवागमन होता है, लेकिन इस 22 किमी के क्षेत्र में 31 लोगों का सफर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका। जो किसी हादसा का शिकार होकर ट्रेन की चपेट में आने और गिरकर अपनी जान गंवा बैठे।

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धौलपुर खंड में साल दर साल बढ़ रही ट्रेन से हताहत होने वालों की संख्या, तीन साल में 31 लोगों ने गंवाई जान The number of train fatalities in the Dhaulpur section is increasing year by year, with 31 people losing their lives in three years

-बीते साल 13 लोग ट्रेन की चपेट, गिरकर हुए मौत का शिकार

-मरने वालों में 12 धौलपुर जिला तो 14 लोग अन्य राज्यों के

धौलपुर.आगरा रेलवे मंडल के धौलपुर खंड में ट्रेन से हताहत होने वालों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। पिछले 3 सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो 3१ लोग ट्रेन की चपेट में आने और गिरकर अपनी जान गवा चुके हैं। जिनमें से 26 मृत लोगों की पहचान की गई तो ५ मृत व्यक्ति अज्ञात रहे। जिनका धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। इसके अलावा लगभग 120 व्यक्ति घायल भी हुए।आगरा रेलवे मंडल का धौलपुर खंड 22 किलोमीटर तक का है और इस खंड से प्रतिदिन150के आसपास ट्रेनों का आवागमन होता है, लेकिन इस 22 किमी के क्षेत्र में 31 लोगों का सफर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका। जो किसी हादसा का शिकार होकर ट्रेन की चपेट में आने और गिरकर अपनी जान गंवा बैठे। इन मरने वाले ३१ लोगों में से २६ की पहुंचान तो की गई, लेकिन पांच मृत व्यक्तियों का अभी तक कोई अता-पता नहीं लग सका। इन मरने वालों में धौलपुर जिले के 12 व्यक्ति तो अन्य राज्यों के 14 लोग शामिल हैं, जबकि 5 मृत व्यक्तियों की पहचान नहीं हो पाई। जानकारी के अनुसार इनमें से कई मौत तो ट्रेनों के पायदान पर बैठकर यात्रा करने वालों की हुई। किसी की ट्रेन से गिरकर तो किसी की लाइन पार करते समय मौत हो गई। हादसे बढऩे का प्रमुख कारण लाइन के पास आबादी क्षेत्र होना है। साथ ही पटरियों के दोनों और फेसिंग भी नहीं है।

साल दर साल बढ़ी मरने वालों की संख्या

धौलपुर परिक्षेत्र में रेल से हताहत होने वालों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। जीआरपी से मिले आंकड़ों के अनुसार 2023 में जहां 7 लोगों ने ट्रेन की चपेट में आने से अपनी जान गंवाई तो 2024 में यह आंकड़ा बढक़र 11 तक पहुंच गया। वहीं गत वर्ष यानी 2025 में ट्रेन से मरने वालों की संख्या बढक़र 13 तक जा पहुंचा। विभाग की मानें तो इन मरने वालों में ट्रेन से गिरकर या फिर पटरी पार करते समय टे्रन की चपेट में आने से अपनी जान गंवाने वाले शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 120 लोग इन तीन सालों में घायल भी हुए हैं।

14 लोग पटरियां पार करते समय हुए हादसे का शिकार

ऐसा नहीं है कि इन दुर्घटनाओं के लिए रेलवे प्रशासन ही जिम्मेदार है। लोगों की लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। हादसे में मारे गए इन 31 लोगों में से14 लोग ऐसे भी हैं जो पटरियां पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से काल के गाल में समा गए। इन हादसों का सबसे बड़ा कारण लोगों का एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाने के लिए पटरियों का पार करने के साथ अन्यंत्र जगहों पर भी पटरी क्रॉस करने के दौरान सावधानी ना बरतना हादसा होने का कारण बन जाता है।

ओवरब्रिज का उपयोग न करना हादसे का भी कारण

धौलपुर रेलवे स्टेशन पर दो ओवर ब्रिज हैं। जिनका उपयोग एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाने के लिए किया जाता है, लेकिन अधिकतर बार देखा जाता है कि लोग इन ओवरब्रिज का इस्तेमाल न करते हुए जल्दी के चक्कर में सीधे पटरियों को क्रोस कर प्लेटफॉर्म पर पहुंचने का प्रयास करते हैं और इसी दौरान यात्री तेज गति से आने वाली ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं और हादसों की भेंट चढ़ जाते हैं। मौतों का आंकड़ा बढऩे के बावजूद इन लोगों को स्टेशन पर कोई रोकने और टोकने वाला तक कोई नहीं होता। आरपीएफ की तरफ से लोगों को जागरूक करने कोई अभियान भी नहीं चलाया जाता।

इन इलाकों में ज्यादा होते हैं हादसे

आगरा मंडल के 22 किमी में फैले धौलपुर खंड में कई प्वाइंट ऐसे हैं जहां हादसों की संख्या ज्यादा है। इनमें धौलपुर स्टेशन, जेल रोड क्रॉसिंग, मनियां क्रॉसिंग, धौलपुर स्टेशन से लेकर पीजी कॉलेज क्रासिंग तक सहित अन्य प्वाइंट भी शामिल हैं। क्योंकि इन इलाकों में रेलवे ट्रैक्स के आस-पास बड़ी संख्या में घनी आबादी है, जहां से कई लोग घूमते हुए या शॉर्टकट मारने के चक्कर में रेलवे ट्रैक क्रॉस करके या पटरी के किनारे चलकर आते-आते हैं और इस चक्कर में कई बार हादसों का शिकार बन जाते हैं।

72घंटे तक होती है मृतक की शिनाख्त

यात्रा के दौरान या फिर ट्रेन की चपेट में आने वाले मृत व्यक्ति की शिनाख्त तक जीआरपी का रोल रहता है। जीआरपी मृत व्यक्ति की डेड बॉडी को कब्जे में लेकर तीन दिन यानी ७२ घंटे तक मृतक की शिनाख्त करने का काम करता है। इस दौरान अगर मृतक की शिनाख्त हो जाती है तो पीएम करा और कार्रवाई कर बॉडी परिजनों को सुपुर्द कर दी जाती है, लेकिन मृतक की शिनाख्त न होने पर जीआरपी नगर परिषद के मिलकर मृतक के धर्मानुसार अंतिम संस्कार कराती है और ऐसे अज्ञात मृतक की शिनाख्त के लिए उसका डीएनए सहित अन्य शिनाख्त योग्य वस्तुएं अपने पास रखती है।

मृतक यात्री को मुआवजा तक का प्रावधान

देखा जाए तो रेलवे नियमों के तहत अगर रेल हादसे में किसी यात्री की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार को 8 लाख रुपए तक का मुआवजा मिल सकता है, लेकिन वह मुआवजा सिर्फ ट्रेन में नियमानुसार यात्रा करने वाले मृत व्यक्ति के परिजन को ही मिलेगा। वहीं गंभीर चोट लगने पर 4 लाख रुपए तक का मुआवजा दिया जा सकता है। इसके अलावा अगर किसी यात्री को हल्की चोट भी लगती है तो उसे 32000 रुपए तक का मुआवजा मिल सकता है।

ट्रेन की चपेट में आने या गिरकर यात्री की मौत हो जाने पर मृतक की शिनाख्त कराई जाती है। डेड बॉडी को ७२ घंटे तक रखा जाता है शिनाख्त न होने पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। पिछले तीन सालों में ३१ लोग ट्रेन से हताहत होकर अपनी जान गंवा चुके हैं।-केपी सिंह, जीआरपी थाना प्रभारी धौलपुर