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जान हथेली पर रख करते कार्य फिर भी फिर भी भूखा रहता परिवार

जयपुर डिस्कॉम के अधीन कार्यरत एफआरटी टीम के कर्मचारियों ने अपने वेतन और एरियर की मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर दिया। कर्मचारियों ने सहायक अभियंता को ज्ञापन सौंपते हुए अपना दर्द बताया और कहा कि सर हमहर पल जान हथेली पर लेकर इस खतरनाक कार्य को करते हैं।

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जान हथेली पर रख करते कार्य फिर भी फिर भी भूखा रहता परिवार They work risking their lives but still their family goes hungry

एफआरटी टीम ने वेतन वृद्धि और एरियर न मिलने पर किया कार्य बहिष्कार

न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलने का लगाया आरोप

dholpur, राजाखेड़ा. जयपुर डिस्कॉम के अधीन कार्यरत एफआरटी टीम के कर्मचारियों ने अपने वेतन और एरियर की मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर दिया। कर्मचारियों ने सहायक अभियंता को ज्ञापन सौंपते हुए अपना दर्द बताया और कहा कि सर हमहर पल जान हथेली पर लेकर इस खतरनाक कार्य को करते हैं।

कर्मचारियों ने कहा कि कौनसा पल हमारी जिंदगी का आखिरी पल हो नहीं पता फिर भी हमारे परिवार अल्प मजदूरी भी पूरी नहीं मिलने के कारण दो जून की सूखी रोटी को भी तरस रहे हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया की कंपनी प्रबंधन के समक्ष बार-बार मांगें रखने के बावजूद न तो वेतन वृद्धि की गई और न ही लंबित एरियर का भुगतान किया गया। एफआरटी टीम ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं वे कार्य नहीं करेंगे और इस दौरान जो भी बिजली व्यवस्था बाधित होगी, उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी। एफआरटी टीम ने सौंपे गए पत्र में उल्लेख किया कि शनिवार दोपहर 12:00 बजे से सभी सदस्य कार्य से विरत रहेंगे। टीम के सदस्यों रामप्रसाद वर्मा, रमेश कुमावत, विनोद, रविशंकर और विपिन कुमार, गौरव ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर कार्य बहिष्कार की घोषणा की। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रयासरत हैं, लेकिन प्रबंधन लगातार अनदेखी कर रहा है। यदि जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

इन मांगों पर आंदोलन

एफ आरटी कर्मियों ने सहायक अभियंता को बताया कि पूर्व कंपनी लाइन मेन को 8055 व हेल्पर को 6551 रुपए देती थी। पूर्व सरकार ने 2023 में 26 रुपए रोज बढ़ोत्तरी की जो उन्हें आज तक नहीं दी गई न 25 फीसदी पीएफ ही पूरा जमा करवाया। उन्होंने मांग पत्र सौंपा कि लाइन मेन को न्यूनतम 21,000 और हेल्पर को 18,000 वेतन दिया जाए। सभी कार्मिकों को एक एक रेस्ट दिया जाए कंपनी मनमाने तरीके से कार्मिकों को हटाने पर रोक लगाई जाए और उन्हें किए गए कार्य का अनुभव प्रमाण पत्र दिया जाए। साथ ही उन्हें सुरक्षा उपकरण दिलाए जाएं। उनका जो शोषण निजी कंपनियां कर रहे हैं उसे रोका जाए।