
- उमड़ती भीड़ और चिकित्सकों के कक्ष रहते खाली
dholpur, राजाखेड़ा. झोलाछाप चिकित्सक के इलाज से जान गंवा बैठे मासूम भूमिक के प्रकरण के बाद झोलाछापों के साथ ही चिकित्सा प्रशासन पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर झोलाछापों के पास लोग जाने को मजबूर क्यों होते हैं। जब सरकार बेहतर चिकित्सा मुफ्त में उपलब्ध कराने का दावा करती है तो फिर गली-गली क्यों झोलाछापों के क्लीनिकों पर भीड़ पहुंचने को मजबूर है।
उपखंड़ के सबसे बड़े चिकित्सालय शहीद राघवेंद्र सिंह उप जिला चिकित्सालय के हालात भी बदतर होते जा रहे हैं और यह खुद बीमार प्रतीत होता है। जिसके चलते लोगों को जब यहां सुविधाएं नहीं मिल पातीं तो वह घर के नजदीक ही किसी न किसी झोलाछाप की शरण में पहुंचने को मजबूर हो जाता हैं। लेकिन वर्षों से शिकायतों के बाद भी चिकित्सालय की व्यवस्थाओं में सुधार की और कदम नहीं बढ़ाये गए हैं।
घंटों की लाइन के बाद इलाज
चिकित्सालय में औसतन 800 से ज्यादा मरीज प्रतिदिन पहुंचते हैं। जहां पंजीकरण और पर्चे का एक ही काउंटर है जो महिला पुरुष में विभाजित है। मरीज का पहला काम पर्चा लेने का होता है जिसमें उसे लंबी लाइन में कम से कम आधा घंटे का इंतजार करना होता है। उसके बाद मरीजों की यही भीड़ चिकित्सक कक्ष में पहुंचती है, लेकिन समय पर चिकित्सक नहीं पहुंचते जिससे पुन: पर्चा लिखवाने में भी आधा घंटा मरीज को फिर धक्का मुक्की का शिकार होना पड़ता है। यहां भी जीत गए तो फिर दवा की लंबी लाइन भी उसे इलाज की जगह और भी गंभीर मरीज बना देती है।
चिकित्साकर्मी नहीं पहुंचते समय पर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चिकित्सालय में चिकित्सक एवं अन्य कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते जिससे लोगों को बेहद परेशानी होती है। पंजीकरण से चिकित्सक से परामर्श व उसके बाद दवा लेने तक एक मरीज को औसतन एक से डेढ़ घंटा लग जाता है।
Published on:
06 Feb 2025 07:08 pm

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