
जानते हैं कि किन बीमारियों में इस फॉर्मूले से बनी दवाएं प्रयोग में ली जाती हैं :
होम्योपैथी में बायोकैमिक फॉर्मूले से बनी दवाएं शरीर में मूल तत्वों की कमी को पूरा करती हैं। ये दवाएं शरीर के मेटाबॉलिज्म (शरीर की ऑक्सीजन व कैलोरी को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया) को प्रभावित करके पहले से उपस्थित तत्वों को सही तरीके से उपयोग में लेती हैं। जानते हैं कि किन बीमारियों में इस फॉर्मूले से बनी दवाएं प्रयोग में ली जाती हैं :
हड्डियों के लिए : दांत निकलते समय बच्चों में चिड़चिड़ापन, कैल्शियम की कमी और फ्रेक्चर में हड्डियों को जोड़ने के लिए बायोकैमिकल फॉर्मूले से बनी कैलकेरिया फोस दी जाती है। इसमें कैल्शियम फॉस्फेट होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है।
ऐसे लें : ३3 व ६3 की पोटेंसी में यह दवा दिन में 3 बार बच्चों और बड़ों को दी जाती है।
बुखार : स्वभाव में चिड़चिड़ापन, सूजन, लंबे समय से चलने वाला बुखार और बच्चों में मिट्टी खाने की आदत को दूर करने के लिए इस फॉर्मूले से बनी फैरम फोस उपयोगी है।
ऐसे लें : ३3, ६3 व १२3 की पोटेंसी वाली 4 गोली बड़ों को और 2 गोली बच्चों को दिन में 3 बार दी जाती है। तुरंत बुखार दूर करने के लिए गोली गुनगुने पानी में घोलकर लेते हैं। ज्यादा चिड़चिड़ेपन में बच्चों को 5-5 मिनट में 5-6 डोज दी जाती है।
पेट व लिवर के लिए : एसिडिटी से पेट में दर्द, जलन, डकार, पीलिया, दूध पीने के बाद छोटे बच्चों का उल्टी करना और लिवर संबंधी परेशानियों में इस फॉर्मूले से बनी नैट्रोम फोस उपयोगी है।
ऐसे लें : ३3, ६3 व १२3 की पोटेंसी वाली 4 गोली बड़ों को और 2 गोली बच्चों को दिन में 3 बार दी जाती है। पेट में ज्यादा एसिडिटी बनने पर 2 गोली 5-5 मिनट के अंतराल में 3-4 बार लें।
रक्त संचार : नसों का फूलना और नीला पडऩा, बच्चों में देरी से दांत निकलना, महिलाओं में डिलीवरी के बाद ज्यादा रक्तस्राव होना और शरीर में किसी भी तरह की गांठ को खत्म करने के लिए इस फॉर्मूले से बनी कैलकेरिया फ्लोर उपयोगी है।
कैसे लें : ३3, ६3 व १२3 की पोटेंसी 4 गोली बड़ों को और 2 गोली दिन में 3 बार दी जाती है। सरल प्रसव के लिए भी सातवें महीने से यह दवा शुरू की जाती है।
Published on:
10 Jan 2019 01:34 pm
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