
ग्लूटेन के प्रयोग से आंतों में संक्रमण होने लगता है जिससे आंतों में पाई जाने वाली विलाई छोटी व चपटी हो जाती है।
सीलियक डिजीज से पीड़ित लोगों को गेहूं, पिज्जा, पास्ता में मौजूद ग्लूटेन से एलर्जी होती है। ग्लूटेन के प्रयोग से आंतों में संक्रमण होने लगता है जिससे आंतों में पाई जाने वाली विलाई छोटी व चपटी हो जाती है। विलाई के डैमेज होने से भोजन पूर्णरूप से अवशोषित नहीं हो पाता है व मरीज कुपोषित हो जाता है। ग्लूटेन एक तरह का प्रोटीन होता है ये गेंहूं आदि में पाया जाता है।
लक्षण : बार-बार डायरिया, लगातार पेट फूलना, एसिडिटी व पेटदर्द, शरीर पर सूजन, खून व विटामिन-के की कमी, कब्ज, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन, वयस्क लोगों में कैल्शियम की कमी या ऑस्टियोपोरोसिस। महिलाओं में अनियमित माहवारी, प्रजनन क्षमता में कमी, गर्भपात आदि।
इलाज : होम्योपैथी दवा से इस बीमारी में राहत मिल सकती है। इसमें आंतों के संक्रमण को ठीक कर विलाई का आकार ठीक किया जाता है जिससे भोजन का अवशोषण होने लगता है व मरीज को आराम मिलता है।
Published on:
02 Apr 2019 04:19 pm
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