Coarse Grains Benefits: भारत में करीब 59 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। इस कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है। पारंपरिक थाली पर ध्यान देकर इस कमी को दूर किया जा सकता है। बाजरा, ज्वार, मक्का, रागी, कुटकी, कोदो, कंगनी, सांवा आदि मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं।
Coarse Grains Benefits: भारत में करीब 59 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। इस कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है। पारंपरिक थाली पर ध्यान देकर इस कमी को दूर किया जा सकता है। बाजरा, ज्वार, मक्का, रागी, कुटकी, कोदो, कंगनी, सांवा आदि मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं। ये पोषक तत्त्वों से भरपूर हैं। अगर सौ ग्राम अनाज में बात करें तो बाजरा में 16.9 मिग्रा, सांवा या समा के चावल में 15.2 मिग्रा, 100 ग्राम कुटकी यानी लिटिल मिलेट्स में 9.3 मिग्रा, और रागी व कंगनी में भी भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है।
ऐसे खिलाएं बच्चों को भी
मोटे अनाज से आप डोसा या इडली का घोल बनाकर उसमें चुकंदर, गाजर, बीन्स और पालक जैसी रंगीन सब्जियों को मिलाकर खिला सकती हैं। अंकुरित मोटे अनाज को टमाटर, चुकंदर, खीरा-ककड़ी और कॉर्न के साथ मिलाकर सलाद या चाट के रूप में, पास्ता या सैंडविच फिलिंग में प्रयोग कर खिला सकती हैं। इसके अलावा मोटे अनाज को भिगोकर फिर पीसकर उससे टिक्की और पेनकेक बना सकती हैं।
गर्भवती को भी जरूर खिलाएं
गर्भावस्था में आयरन की कमी को पूरा करने में मोटा अनाज सहायक हो सकता है। हालांकि इस पर पूरी तरह से निर्भर न रहने की सलाह दी जाएगी, क्योंकि इसकी आवश्यकता पूरी तरह से गर्भवती महिला में मौजूद आयरन की मात्रा पर निर्भर करेगी। वैसे इस समय आप मिलेट्स यानी मोटे अनाज को भिगोकर, किण्वित कर या अंकुरित कर खा सकती हैं।
दही-छाछ में भिगोकर खाने से ज्यादा फायदा देता बाजरा
मोटे अनाज से आपको आयरन सही रूप में मिले, इसके लिए इसे किस तरह से प्रयोग में लेना है, इस बारे में भी जानना जरूरी है।
अंकुरण : बाजरे को 6-8 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। पानी को निथारकर एक ढके हुए हवादार कंटेनर में रख दें। 8-10 घंटे बाद इसे धो लें और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। एक बार जब छोटे-छोटे स्प्राउट्स दिख जाएं तो उन्हें तुरंत स्टीम्ड/ पके रूप में सेवन कर सकते हैं।
किण्वन: बाजरे को दही या छाछ में डालकर भिगो दें और रातभर छोड़ दें। इससे यह फूल जाएगा। फिर इसे पीसकर घोल बना लें या तरल निथार कर खिचड़ी, दलिया आदि बनाने के लिए पका लें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।