
Ragi health benefits
Ragi health benefits: सेहत के लिए लोग एक बार फिर से अपने पारम्परिक खानपान की तरफ लौट रहे हैं। गेहूं और चावल की बजाय खाने में मोटे अनाज को वरीयता दे रहे हैं। रागी को इसमें सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। बदलते वक्त के साथ रागी को लेकर कई तरह के नए प्रयोग भी हो रहे हैं, इस वजह से बच्चों को भी अपने पसंदीदा केक, बिस्किट आदि में रागी के रूप में हैल्दी ऑप्शंस मिल रहे हैं।
पोषक तत्त्वों की मात्रा
इसे दक्षिण में रागी तो पश्चिमी भारत में नाचणी और पहाड़ी व तराई इलाकों में मडुआ कहते हैं। न्यूट्रिशनल वैल्यू (प्रति 100 ग्राम में) - कैलोरी - 320.74, प्रोटीन - 7.16, फाइबर - 11.18, कैल्शियम -364 मिग्रा, कैरेटोनॉइड - 154 माइक्रोग्राम, आयरन - 4.62 मिग्रा।
तनाव से बचाता है रागी
इसमें कैल्शियम की मात्रा दूध से दोगुनी होती है। इसमें अमिनो एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट्स व फाइबर के गुण होते हैं जो प्राकृतिक रूप से तनाव मुक्ति, माइग्रेन से बचाव, वजन कम व डायबिटीज में मदद कर सकते हैं। रागी को किसी भी मौसम में खा सकते हैं।
100 ग्राम रागी का सेवन करना चाहिए दिनभर में। इसे आप अलग-अलग रूप में लें। दस साल से छोटे बच्चों को 50 ग्राम जितना खिलाएं।
02 गुना ज्यादा होती है कैल्शियम की मात्रा रागी में, दूध के मुकाबले। इसीलिए इसे पूअर मैन्स मिल्क भी कहा जाता है।
किस रूप में खाएं
इसमें पॉलिफिनॉल एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा प्रचुर होती है। यह आसानी से पच जाती है। दक्षिण में रागी की इडली, डोसा, अप्पे, उपमा, गुजरात-महाराष्ट्र में नाचणी की रोटी, लड्डू बनाए जाते हैं। बच्चों के लिए इसके बिस्किट, केक, पेनकेक, नाचोज और फिंगर चिप्स बनाए जा सकते हैं। दूध से एलर्जी में इसे अपना सकते हैं। इसे चीला, परांठे के रूप में खा सकते हैं। डायबिटीज, कब्ज, विटामिन डी की कमी हो तो भी यह अच्छा विकल्प है।
मरीज को खिचड़ी या दलिया के रूप में देना अच्छा
मरीज को रागी का उपमा भी खाने को दे सकते हैं। इससे उन्हें किसी तरह की समस्या (ब्लॉटिंग) नहीं होती। इसमें सॉल्यूबल फाइबर अच्छा मात्रा में होती हैं, जिससे कब्ज संबंधी शिकायत नहीं होती। इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम अच्छी मात्रा में मौजूद होता है। इसे खिचड़ी-दलिये का विकल्प माना जा सकता है।
कौन इसे न खाए
किडनी में स्टोन, थायरॉइड, कब्ज या डायरिया की समस्या है तो डॉक्टरी सलाह के बाद ही खाना चाहिए। इसमें कैल्शियम अधिक होने से स्टोन और फाइबर अधिक होने से डायरिया बढ़ सकता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
01 Aug 2023 06:21 pm
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