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तुलसी के सेवन से कम होगा यूरिक एसिड, एेसे करें सेवन

तुलसी के नियमित प्रयोग से वातरक्त यानी बढ़े हुए यूरिक एसिड के स्तर में सुधार होता है।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Mar 04, 2019

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तुलसी के नियमित प्रयोग से वातरक्त यानी बढ़े हुए यूरिक एसिड के स्तर में सुधार होता है।

तुलसी का पौधा कई चिकित्सीय गुणों से भरपूर है। तुलसी को कालीमिर्च के साथ क्वाथ बनाकर प्रयोग करने से बुखार में लाभ मिलता है। जोड़ों के दर्द यानी आर्थराइटिस में इसकी पत्तियों का अजवाइन के साथ प्रयोग करना लाभकारी है।

तुलसी के नियमित प्रयोग से वातरक्त यानी बढ़े हुए यूरिक एसिड के स्तर में सुधार होता है। इसके पत्तियों का कालीमिर्च और शुद्ध घी के साथ प्रयोग करने से वात रोगों में आराम मिलता है। त्वचा में खुजली होने पर तुलसी और नीम की पत्तियों को पीसकर लगा सकते हैं। जावित्री और शहद को साथ मिलाकर प्रयोग करने से तुलसी टायफॉइड में आराम देती है।

अड़ूसा के पत्तों के साथ प्रयोग करने से यह खांसी में आराम देती है। पेशाब में जलन होने पर इसकी पत्तियों को दूध या पानी के साथ ले सकते हैं। दिनभर में तुलसी की 3-4 पत्तियां खा सकते हैं। इसकी पत्तियों को कभी चबाएं नहीं क्योंकि इनमें मरकरी (पारा) होती है जो दांतों की इनेमल लेयर को नुकसान पहुंचा सकती है।