
ये आयुर्वेदिक लड्डू कई रोगों में फायदेमंद रहते हैं और फूड सप्लीमेंट का भी काम करते हैं। जानते हैं इनके बारे में-
त्योहार, उत्सव, पार्टी या अन्य कोई कार्यक्रम हो, मिठाइयों का चलन खासा प्रचलित है। लेकिन इन मिठाइयों में मिलावट और क्वालिटी को लेकर लोग चिंतित रहते हैं। मीठे के साथ सेहत का एक विकल्प हर्बल लड्डू हो सकते हैं। ये आयुर्वेदिक लड्डू कई रोगों में फायदेमंद रहते हैं और फूड सप्लीमेंट का भी काम करते हैं। जानते हैं इनके बारे में-
दानामेथी लड्डू -
ये लड्डू गेहूं का आटा, दानामेथी, देसी घी, सौंठ, कालीमिर्च, हल्दी और गुड़ के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं।
लाभ -
ये बुजुर्ग लोगों की हड्डियों को मजबूत बनाते हैं जिससे जोड़ों के दर्द में लाभ होता है। इन्हें खाने से पाचनतंत्र दुरुस्त रहता है और पेट संबंधी परेशानियां नहीं होती। इनसे शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है।
मात्रा
इसका एक लड्डू सुबह व एक लड्डू रात को सोते समय दूध के साथ लेने से शरीर को एनर्जी मिलती है और पेट साफ होता है। इन लड्डुओं का प्रयोग अक्टूबर से मार्च तक किया जा सकता है।
जापे के लड्डू
गेहूं का आटा, देसी घी, सुपारी, शतावरी, कमरकस गोंद, लोध्र, लाजवन्ती, जायफल, जावित्री, सौंठ सतवा, बूरा, बादाम, खरबूजे की गिरि और मखाना आदि के मिश्रण से इन लड्डुओं को बनाया जाता है।
लाभ
ये लड्डू डिलीवरी के बाद महिला को दिए जाते हैं। प्रसव से लगभग 40 दिन तक इनका उपयोग किया जा सकता है। जिनकी डिलीवरी सर्जरी या जटिलता से होती है, उन्हें ये लड्डू नहीं दिए जाते। सर्जरी के टांके ठीक होने के बाद ही इनका सेवन कराया जाता है क्योंकि ये तासीर में गर्म होते हैं जिससे टांकों के प्रभावित होने की आशंका रहती है। इनका प्रयोग अनुभवी महिला या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ के मार्गदर्शन से ही करें।
मात्रा
इन लड्डूओं का प्रयोग गर्म दूध के साथ लाभकारी होता है। इन्हें खाने के एक घंटे तक ठंडी चीजें न लें। विशेष लाभ लेने के लिए इन लड्डूओं के साथ अन्य किसी खाद्य सामग्री का प्रयोग न करें। ध्यान रहे कि महिलाएं इनका प्रयोग अपनी पाचनशक्ति के अनुसार ही करें। इन लड्डुओं को फ्रिज में न रखकर हवा के संपर्क में रखें और ध्यान रखें कि इनमें पानी न लगने पाए।
ग्वारपाठे के लड्डू
इन्हें गेहूं का आटा, देसी घी, ग्वारपाठा (एलोवेरा), अजवाइन, हल्दी, अश्वगंधा, मुलहठी, पीपल, सौंफ और बूरा आदि से बनाया जाता है।
लाभ
ये शारीरिक शक्ति और क्षमता बढ़ाते हैं व वजन को सामान्य बनाए रखते हैं। ये लिवर व पाचनतंत्र का भी खयाल रखते हैं।
मात्रा
इसका एक लड्डू सुबह और एक लड्डू शाम को मीठे दूध के साथ लें। इनका प्रयोग पूरे साल किया जा सकता है।
गोंद के लड्डू
गेहूं का आटा, देसी घी, गोंद, कालीमिर्च, खरबूजे की गिरि, बादाम और बूरे से ये लड्डू बनाए जाते हैं।
लाभ
ये महिलाओं के लिए काफी लाभदायक होते हैं जो उनकी हड्डियोंं को पोषण और मजबूती प्रदान करते हैं।
मात्रा
एक लड्डू सुबह और एक लड्डू शाम को दूध के साथ लें।
अलसी के लड्डू
गेहूं का आटा, देसी घी, अलसी बीज, कालीमिर्च, सौंफ, लौंग, जायफल, जावित्री, पीपल और बूरा आदि से इन्हें तैयार किया जाता है।
लाभ
ये हृदय व जोड़ों के लिए उपयोगी होते हैं जो शरीर को मजबूती प्रदान करते हैं। ये वजन को भी नियंत्रित रखते हैं।
मात्रा
एक लड्डू सुबह और एक लड्डू शाम को कम मीठे दूध के साथ लें। इनका प्रयोग सर्दियों में ज्यादा लाभदायक होता है।
मूसली-अश्वगंधा के लड्डू
ये लड्डू गेंहू का आटा, देसी घी, मूसली, अश्वगंधा, बादाम, खरबूजे की गिरि, खोपरा, जावित्री, जायफल, इलायची, लौंग, दालचीनी और बूरा आदि के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं।
लाभ
ये पोषक तत्व प्रदान कर शरीर को मजबूत बनाते हैं।
मात्रा
रोजाना सुबह और शाम एक-एक लड्डू कम मीठे दूध के साथ लें। सुबह केवल एक लड्डू को भी नाश्ते के तौर पर खाया जा सकता है।
कौंच बीज के लड्डू
ये लड्डू गेहूं का आटा, देसी घी, कौंच बीज, अश्वगंधा, कालीमिर्च, लौंग, जायफल, जावित्री, पीपल और बूरा आदि से बनाए जाते हैं।
लाभ
खासकर बच्चों व महिलाओं के लिए यह ज्यादा फायदेमंद होते हैं। इसे खाने से शरीर में पोषक तत्वों की पूर्र्ति होती है और मजबूती आती है।
मात्रा
रोजाना सुबह और शाम एक-एक लड्डू दूध के साथ लें।
Published on:
16 Feb 2019 03:31 pm
बड़ी खबरें
View Allडाइट फिटनेस
स्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
