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Eat Grains Properly: अनाज को सही तरह से खाना है बहुत जरूरी, थैरेपी जैसे मिलते हैं परिणाम

हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है अनाज। लेकिन कौनसा अनाज कितना फायदेमंद है इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। आइए जानते हैं कि खाने में किस अनाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसे ज्यादा नहीं खाना चाहिए।

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जयपुर

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Jyoti Kumar

Jun 11, 2023

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हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है अनाज। लेकिन कौनसा अनाज कितना फायदेमंद है इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। आइए जानते हैं कि खाने में किस अनाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसे ज्यादा नहीं खाना चाहिए।

चावल
चावल जितना पुराना हो उतना ही स्वादिष्ट होता है। चावल में प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्व होते हैं। अगर रात के खाने में रोटी कम खाई जाए और चावल का प्रयोग ज्यादा किया जाए, तो यहहल्का भोजन आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा। चावल के चिवड़े को दूध में भिगोकर खाने से कब्ज दूर होती है।

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ऐसे खाएं: चावल के मांड में प्रोटीन, विटामिन व खनिज होते हैं जो सेहत के लिए लाभदायक होते हैं, इसलिए चावल में से मांड ना निकालें। बच्चे को छह महीने का होते ही चावल का मांड देना चाहिए। यह बढ़ते बच्चे के लिए फायदेमंद होता है।

मूंग
मूंग को अंकुरित करने के बाद इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की मात्रा दोगुनी हो जाती है।
ऐसे खाएं: बुखार व दस्त होने पर मूंग की दाल बनाते समय रोगी की स्थिति के अनुसार काली मिर्च व अदरक डाल दें, लेकिन इसे ज्यादा घी में ना बनाएं।

चना
भुने चने के साथ गुड़ खाने से कफ की समस्या दूर होती है। रात को भुना चना खाने से खांसी ठीक होती है। इसमें आयरन होने से यह महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।
ऐसे खाएं: 10 किलो आटे में एक किलो चने को पिसवा लें, इस आटे से बनी रोटी हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापे को दूर करती है।

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उड़द
ड़द की दाल गर्मियों से ज्यादा सर्दियों में उपयोगी होती है। यह बवासीर के रोग में फायदेमंद होती है। इसमें आयरन काफी मात्रा में होता है जो कि खून की कमी को दूर करता है।
ऐसे खाएं: इसकी दाल, लड्डू या हलवा बनाकर खा सकते हैं।

मसूर
मसूर की प्रकृति गर्म, शुष्क, रक्तवद्र्धक और खून में गाढ़ापन लाने वाली होती है। दस्त, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में मसूर की दाल का सेवन लाभकारी होता है। दस्त होने पर मसूर की दाल खानी चाहिए। मसूर दाल की खिचड़ी भी बना कर खा सकते हैं। बवासीर के रोगियों के लिए मसूर की दाल गुणकारी है।

आदतें बदलकर रहें हैल्दी
आप ‘काइजेन’ पर आधारित जेन डाइट को अपनाकर जीवन को कई मायनों में बेहतर बना सकते हैं, आइए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है काइजेन: काइजेन एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ होता है लगातार छोटे-छोटे सुधार। इसी को आधार बनाकर जेन डाइट प्लान तैयार किया गया है। इस प्लान में खानपान, लाइफस्टाइल, मानसिक स्थिति और व्यायाम पर फोकस किया जाता है।

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फायदा: जेन डाइट में आपको अपनी आदतें सुधारनी होती हैं जैसे कि आप बहुत चॉकलेट, फास्ट फूड आदि खाते हैं तो कोई दो आदतें बदलने का निश्चय करें और कोई दो अच्छी आदतें अपनाएं जैसे खूब पानी पीना और फल खाना। जब आपकी ये आदतें सुधर जाएं तो दूसरी आदतों पर फोकस करें।

कैसे करें: अपने खाने में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें। सलाद, फल जरूर खाएं। दिन में चार से पांच बार खाएं। अपनी डाइट को अपने दोस्तों से फेसबुक या ट्विटर पर शेयर करें ताकि आपको और बेहतर डाइट के बारे में जानकारी मिल सके। इसके अलावा अपने सोने व जागने का समय तय कर लें और पर्याप्त नींद जरूर लें।

चीटिंग डे: इस प्लान में आप किसी भी एक दिन चीट कर सकते हैं यानी आप जो भी खाना चाहते हैं दिल खोलकर खाएं।

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