
विटामिन्स 13 तरह के हैं। इन्हें दो वर्गों में बांटा गया हैं। फैट सॉल्यूबल और वाटर सॉल्यूूबल। ए, डी, ई और के फेट सॉल्यूबल विटामिन्स हैं।
व्यस्त दिनचर्या और असंतुलित खानपान से हमारे शरीर में जरूरी विटामिंस कम होने लगे हैं जिस वजह से कमजोरी, थकान और रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। भोजन में अनाज, फल व सब्जियों जैसा पौष्टिक आहार लेकर इस तत्त्व की पूर्ति कर सकते हैं।
विटामिन्स 13 तरह के हैं। इन्हें दो वर्गों में बांटा गया हैं। फैट सॉल्यूबल और वाटर सॉल्यूूबल। ए, डी, ई और के फेट सॉल्यूबल विटामिन्स हैं। इन विटामिंस को शरीर में छह माह तक स्टोर किया जा सकता है। विटामिन-बी और सी वाटर सॉल्यूबल विटामिंस हैं जिन्हें शरीर स्टोर नहीं करता। इनकी पूर्ति नियमित करनी पड़ती है।
vitamin A-
यह हमारे इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी एंटीआक्सीडेंट है। हमारी आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए इसमें बीटा कैरोटीन होता है जिससे आंखों के कॉर्निया व झिल्लियों से जुड़ी समस्या दूर होती है।
इसकी कमी से नुकसान: आंखों की कमजोरी से कम दिखने या नाइट ब्लाइंडनेस जैसी समस्याएं होती हैं।
इन से होगी पूर्ति: गाजर, मिर्च, शकरकंद, आलू व मौसमी खाएं।
vitamin B1 -
यह कई न्यूरोट्रांसमीटर्स व एंजाइम्स प्रोसेसिंग में मदद करता है। इसे थाईमाइन तत्त्व भी कहते हैं।
इसकी कमी से नुकसान : पाचनतंत्र कार्बोहाइड्रेट को नहीं पचा पाता और ऊर्जा कम मिलती है। तंत्रिका तंत्र कमजोर हो जाता है।
इन से होगी पूर्ति: मटर, सोयाबीन, ओटमील, दालें, सूरजमुखी के बीज, फूलगोभी, आलू और संतरा।
vitamin B6 -
य ह कई न्यूरोट्रांसमीटर्स व एंजाइम्स प्रोसेसिंग में मदद करता है। इसे थाईमाइन तत्त्व भी कहते हैं।
इसकी कमी से नुकसान: पाचनतंत्र कार्बोहाइड्रेट को नहीं पचा पाता और ऊर्जा कम मिलती है। तंत्रिका तंत्र कमजोर हो जाता है।
इन से होगी पूर्ति: मटर, सोयाबीन, ओटमील, दालें, सूरजमुखी के बीज, फूलगोभी, आलू और संतरा।
vitamin B9 -
इसे फॉलिक एसिड भी कहते हैं जो गर्भस्थ शिशु के विकास और हृदय की सेहत के लिए जरूरी है।
इसकी कमी से नुकसान: गर्भावस्था में न्यूरल ट्यूब में खराबी हो सकती है। लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण कम हो जाता है।
इन से होगी पूर्ति: हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, टमाटर, फॉर्टीफाइड अनाज जैसे दालें, बाजरा, गेहूं और फलियां।
vitamin B12 -
य ह डीएनए के निर्माण और किसी भी प्रकार के घाव को भरने में मदद करता है। नर्वस सिस्टम को मजबूत कर हृदय रोगों से भी बचाता है।
इसकी कमी से नुकसान: शारीरिक कमजोरी और न्यूरोलॉजिकल समस्या।
इन से होगी पूर्ति: दूध, छाछ, दही, पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स।
vitamin B-C
एंटीऑक्सीडेंट गुणों की प्रचुरता के कारण यह इम्यून सिस्टम, घाव भरने और हृदय के लिए जरूरी है। यह कई रोगों का प्रतिरोधक भी है।
इसकी कमी से नुकसान: शरीर में खून की कमी हो जाती है।
इन से होगी पूर्ति: संतरा, मिर्च, नींबू, फूलगोभी, आंवला, स्ट्रॉबेरी, गोभी में विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होता है।
vitamin D -
ह ड्डियों व दांतों की मजबूती और सेहत के लिए यह सहायक है। यह इम्यून सिस्टम और मसल्स को मजबूत करता है।
इसकी कमी से नुकसान: हड्डियों और मांसपेशियों के कमजोर होने से जोड़ों में दर्द रहता है। शारीरिक संरचना में विकार हो सकता है।
इन से होगी पूर्ति: मशरूम, बादाम, फोर्टीफाइड अनाज दूध, पनीर, छाछ और दही। खानपान के अलावा सूर्य की रोशनी से भी हमें विटामिन-डी मिलता है।
vitamin E-
य ह बेहद शक्तिशाली एंटीआक्सीडेंट है जो हृदय की कार्यक्षमता सुधारकर त्वचा को जवां बनाए रखता है।
कमी: मांसपेशियों की कमजोरी के अलावा नसों को क्षति को क्षति पहुंचता है व आंखों की रोशनी प्रभावित होती है।
इन से होगी पूर्ति: लौंग, नट्स, खीरा, प्याज, ऑलिव ऑयल, रसबैरी, साबुत अनाज, टमाटर और आम।
Published on:
26 May 2019 02:48 pm
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