
गोरखपुर. करंजिया विकासखंड के अंतर्गत कस्बा गोरखपुर सहित अंचल के गांव-गांव इन दिनों प्राकृतिक रूप से उगे बबूल के पेड़ की कटाई और परिवहन का काम तेजी से चल रहा है। बबूल पेड़ के आड़ में सक्रिय वन माफिया प्रतिबंधित लकडिय़ों को भी काट कर धड़ल्ले से इनका विक्रय कर रहे हैं। बताया गया कि इन दिनों अंचल के अलग-अलग स्थानों में बबूल के हरे भरे पेड़ों को काटकर आसपास के शहरों सहित छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न शहरों में बेंचा जा रहा है। बबूल पेड़ की लकड़ी के आड़ में वन माफिया प्रतिबंधित लकड़ी दुर्लभनुमाति के पीपल, बरगद, शीशम, सागौन, खमार के अलावा फलदार पेड़, आंवला, जामुन, आम, महुआ, हर्रा, बहेड़ा सहित अन्य और पेड़ जो नहीं काटे जा सकते हैं इन्हें भी काटकर छोटे बड़े ट्रक 709 टै्रक्टर के माध्यम से आर्थिक लाभ के लिए अन्य शहरों स्थानों में विक्रय कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बबूल के पेड़ को काटने एवं इसकी लकड़ी को बेचने के लिए किसी प्रकार की सहमति अनुज्ञा पत्र, टीपी नहीं लगती और न ही वन विभाग का अमला बबूल की लकड़ी में लगे परिवहन करते वाहनों की पड़ताल करता इसी बात का फायदा उठाते हुये वन माफिया इस क्षेत्र से लकड़ी तस्करी के कार्य को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं। जबलपुर अमरकंटक मुख्य मार्ग गोरखपुर, गोपालपुर, झनकी, झापाटोला, गोपालपुर, चाड़ा, रूसा, गोपालपुर मार्ग सहित ग्रामीण क्षेत्रों के पहुंच मार्ग के किनारे लग बबूल के हरे भरे पेड़ों को काट कर विक्रय कर दिया गया, लेकिन इनकी जानकारी विभाग को नहीं लगी बताया गया कि विभिन्न मार्गों पर वर्षों पुराने बबूल के पेड़ लगे हुये थे, यह पेड़ सड़क निर्माण में भी बाधा नहीं बने बावजूद इसके बबूल पेड़ के कारोबार से जुड़े लोगों ने इन पेड़ों को कटवा दिया। वर्तमान में जगह-जगह भारी संख्या में कटे पेड़ों के ठूंठ है। जो अपने विनाश की गवाही दे रहे हैं। इस प्रकार वन माफिया प्रकृति के साथ इन पेड़ों को काटकर पर्यावरण संतुलन को बिगाडऩे के साथ सौंदर्यीकरण को भी नष्ट करने पर उतारू हैं। इस मामले में लोक निर्माण विभाग भी अनजान बना बैठा है। जबकि सड़क के बीच से 40 फीट अथवा 80 फीट दोनों तरफ फुटपाथ पर लगाये गए पेड़ पौधे लोक निर्माण विभाग की संपत्ति मानी जाती है और इसकी देखरेख करना लोक निर्माण का मुख्य दायित्व है। इसी तरह ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, कोटवार, वन विभाग और राजस्व विभाग के पटवारियों की भी जवाबदेही होती है कि ऐसे तत्वों पर कड़ी नजर रखें और यदि कोई व्यक्ति इन पेड़ों को काटता है तो इन पर सख्त कार्रवाई करें। यह अधिकार शासन ने वन विभाग को भी देख रहा है कि राजस्व की धारा 240, 241 के अंतर्गत काटे गये पेड़ों को जप्तकर प्रकरण राजस्व विभाग को सौंपे परंतु यहां की स्थिति से सभी विभाग अनजान बनकर अपने जिम्मेदारी पर पर्दा डाले हैं।
सक्रिय है वन माफिया
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वन माफिया लकडिय़ों की तस्करी रात्रि में करते हैं। ये सूनसान इलाकों के मार्गों से वाहनों में भर भरकर छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न शहरों सहित आसपास के जिलों में पहुंचा रहे हैं। इनका यह कारोबार इन दिनों दिन दूनी रात चौगुनी के तर्ज पर फल-फूल रहा है। जिससे यह वन माफिया बेलगाम होते जा रहे हैं। हाल ही के दिनों में हुई चंदन के पेड़ों की चोरी को भी ग्रामीण इसी कड़ी में जोड़कर देख रहे हैं।
इनका कहना है
बबूल के पेड़ राजस्व क्षेत्र में होने के कारण कटाई की अनुमति राजस्व विभाग द्वारा दी जाती है। यदि बबूल के पेड़ की आड़ में अन्य प्रजाति के पेड़ों की कटाई और परिवहन किया जा रहा है, तो वाहनों की जांच की जायेगी और ऐसा पाया जाता है तो कार्रवाई की जावेगी।
एसजे सिंह, वन परिक्षेत्र अधिकारी गाड़ासरई
Published on:
12 Apr 2018 05:04 pm
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