script मुंह में ये 3 लक्षण देखकर समझें कि आपकी ब्लड शुगर बढ़ रही है | 3 Mouth Symptoms That Could Be a Sign of Diabetes | Patrika News

मुंह में ये 3 लक्षण देखकर समझें कि आपकी ब्लड शुगर बढ़ रही है

locationजयपुरPublished: Nov 18, 2023 02:37:19 pm

Submitted by:

Manoj Kumar

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। यह एक गंभीर बीमारी है जो कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। डायबिटीज के कई लक्षण होते हैं, जिनमें से कुछ मुंह में भी दिखाई दे सकते हैं।

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3 Mouth Symptoms That Could Be a Sign of Diabetes
ब्लड शुगर जब भी शरीर में बढ़ता है तो उसके संकेत शरीर में नजर आने लगते हैं। ब्लड शुगर के संकेत वैसे तो शरीर कई तरह से देता है, लेकिन यहां आज आपको दो ऐसे संकेत के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मुंह में नजर आते हैं।
इंसुलिन के कम निकलना एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। ब्लड में जब शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है और इंसुलिन इनएक्टिव हो जाता है तब डायबिटीज होती है। डायबिटीज टाइप वन अनुवांशिक या जन्मजात होता है, जबकि टाइप टू की वजह बिगड़ी लाइफस्टाइल और खानपान की आदत होती है।

तो चलिए जानें कि डायबिटीज या ब्लड शुगर बढ़ने पर मुंह में कौन से तीन लक्षण नजर आते हैं।
1. मुंह अगर अचानक बहुत सूखने लगा हो और सलाइवा (लार) कम बन रहा हो।
2. मुंह से फलों की महक आए या बदबू आने लगे।
3. दांत में कैविटी और खून की समस्या नजर आए।

डायबिटीज के अन्य लक्षण भी पहचानें
- रात में तीन से चार बार यूरिन का आना
- बहुत अधिक प्यास लगना
- थकावट और कमजोरी महसूस होना
- वजन का कम होना
- नजर कमजोर होना या धुंधला दिखना
- प्राइवेट पार्ट में खुजली और जख्म का देरी से ठीक होना।
नॉर्मल ब्लड शुगर का लेवल कितना होता है
खाने से पहले स्वस्थ व्यक्ति का टार्गेट ब्‍लड शुगर लेवल 100 mg/dl से कम होना चाहिए। वहीं, डायबिटिक का ब्लड शुगर लेवल 80-130 mg/dl तक होना चाहिए। जबकि खाना खाने के बाद स्वस्थ व्यक्ति का ब्‍लड शुगर लेवल 140 mg/dl से कम, तो वहीं डायबिटिक का 180 mg/dl से कम होना चाहिए।
डायबिटीज के कारण
- गलत खान-पान
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज होने से
- हार्मोंन्स का असंतुलन
- बढ़ती उम्र
- कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ना

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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