Coronavirus Update: मां से नवजात में फैल सकता है कोरोना, शोधकर्ताओं ने जताई आशंका

Coronavirus Update: अब तक माना जा रहा था कि मां से नवजात शिशु में काेराेनावायरस नहीं फैल सकता। लेकिन अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल (JAMA) कि एक रिपोर्ट में मां से बच्चे में नोवल कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) के संचरण का एक संभावित मामला सामने आया है

coronavirus Update: अब तक माना जा रहा था कि मां से नवजात शिशु में काेराेनावायरस नहीं फैल सकता। लेकिन अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल (JAMA) कि एक रिपोर्ट में मां से बच्चे में नोवल कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) के संचरण का एक संभावित मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार वुहान विश्वविद्यालय के रेनमिन अस्पताल और अन्य अस्पतालों के शोधकर्ताओं ने नवजात शिशु में कोरोनोवायरस के खिलाफ एंटीबॉडी (आईजीएम) के स्तर को ऊंचा पाया।

बताया गया है कि 31 जनवरी को मां के चेस्ट की सीटी स्केन रिपोर्ट में दोनों दोनों फेफड़ों में संक्रमण के विशिष्ट लक्षण मिलने के बाद, कोरोनोवायरस संक्रमण की पुष्टि की गई। 2 फरवरी को मां को वुहान के रेनमिन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां चार बार किए गए आणविक परीक्षणों ने पुष्टि की कि वह वायरस के लिए सकारात्मक थी।

सीजेरियन सेक्शन
22 फरवरी को महिला ने सीजेरियन सेक्शन के द्वारा नेटेटिव प्रेशर आइसोलेशन रूम एक शिशु को जन्म दिया। नवजात शिशु में वायरस के संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए माँ ने N95 मास्क पहना था। प्रसव के बाद मां नवजात शिशु के शारीरिक संपर्क में नहीं आई। मां के जननांग में भी वायरस के अंश नहीं मिले थे।

नवजात शिशु में जन्म के दो घंटे से लेकर 16 दिनों तक संक्रमण के नकारात्मक परीक्षण किए गए।

हालांकि, नवजात में जन्म के दो घंटे बाद भी नोवल कोरोनोवायरस के खिलाफ एंटीबॉडी का ऊंचा स्तर दिखाई दिया और 7 मार्च तक ऊंचा बना रहा, जब मां और बच्चे को छुट्टी दे दी गई। हालांकि, जब तक एमनियोटिक द्रव और प्लेसेंटा के आणविक परीक्षण नहीं किए गए थे।

लेखकों का कहना है कि एंटीबॉडी (IgM) को प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। तो संभावना है कि जिस दिन माता को वायरस के लिए सकारात्मक निदान किया गया था, उस दिन से कम से कम 23 दिनों के लिए भ्रूण वायरस के संपर्क में था।

हालांकि, बच्चे का जन्म सीजेरियन हुआ था, फिर भी प्रसव के समय वायरस संक्रमण की आशंका को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। लेकिन अगर ये मान भी लिया जाए कि प्रसव के समय बच्चे को सक्रमण हुआ, तो भी एंटीबॉडीज दिखने में तीन से सात दिन लगते हैं। जबकि, इस मामले में, प्रसव के दो घंटे बाद ही एंटीबॉडी देखी गईं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि ऊंचा IgM एंटीबॉडी स्तर से पता चलता है कि नवजात गर्भाशय में संक्रमित था। आईजीजी एंटीबॉडी को नाल के माध्यम से भ्रूण में प्रेषित किया जा सकता है। इसलिए, ऊंचा IgG स्तर मातृ या शिशु संक्रमण को दर्शाता है। हालांकि एमनियोटिक द्रव और प्लेसेंटा के आणविक परीक्षण (जो इस मामले में नहीं किए गए थे) सकारात्मक दिखने पर ही संचरण का सबूत मिल सकता है।

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युवराज सिंह Desk
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