मसूड़ों में सूजन, खून आना और दांत ढीले होना है जिंजिवाइटिस

मसूड़ों में सूजन, खून आना और दांत ढीले होना है जिंजिवाइटिस

Gingivitis रोग से बचाव के लिए ओरल हाइजीन बेहद जरूरी है, इसके लिए सुबह और रात को सोने से पहले ब्रशिंग करें।

मसूढ़ों में सूजन, खून आना या फिर इनका लाल होना जिंजिवाइटिस ( Gingivitis ) रोग कहलाता है। कई बार ऐसा एक बार होकर अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन यदि ऐसा बार-बार हो तो डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है। वर्ना इस समस्या के बने रहने पर दांत जड़ से ढीले होकर गिरने लगते हैं। आयुर्वेद में इस रोग को दंतमोल गति व्याधि के नाम से जानते हैं। वहीं होम्योपैथी में जिंजिवाइटिस का मुंह के दाएं या बाएं ओर होने पर इलाज निर्भर करता है।

समस्या के लक्षण ( Gingivitis symptoms)
मसूढ़ों में सूजन के अलावा खून आना, दर्द और जलन होना अहम हैं। मसूढ़ों का रंग बदलना और चमकीले होना भी इसकी पहचान है।

कारण ( Gingivitis cause)
दांतों पर बैक्टीरिया की परत ब्रश करने के बावजूद जमती रहती है। जो दांतों पर पीलेपन के रूप में दिखती है। इसके अलावा किसी प्रकार की एलर्जी या बैक्टीरियल, वायरल व फंगल इंफेक्शन होना। एंटीहाइपरटेंसिव व इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेने से भी ऐसा होता है। कई बार एकदम गर्म खानपान भी वजह बनता है। विटामिन-सी की कमी से भी यह दिक्कत होती है।

रोग संबंधी समस्याएं
मुंह व गले से जुड़ा सबएक्यूट बैक्टीरियल एंडोसाइडाइटिस से मसूढ़ों में बार-बार इंफेक्शन होकर जिंजिवाइटिस होता है। ऐसे में यह धीरे-धीरे गले के जरिए शरीर में फैलकर दिल की बीमारी की आशंका को बढ़ा देता है। फ्लोराइड वाला पानी पीने से भी यह हो सकता है।

कारगर नुस्खे ( gingivitis treatment )
विटामिन-सी युक्त खट्टी चीजें खाने, काढ़ा व विभिन्न तेलों से गरारे करने व मसूढ़ों की मालिश कर सकते हैं। नीम व बबूल के पेड़ की ताजा डंठल से दातुन करें।

अमरूद व काला जामुन के पेड़ की पत्तियों को चबाने और अपामार्ग की जड़ से दातुन करने से दांत व मसूढ़े मजबूत होते हैं। 20-30 एमएल सरसों, तिल, नारियल, लौंग या कलौंजी के तेल से ऑयल पुलिंग कर सकते हैं।

क्या है इलाज
जिंजिवाइटिस के इलाज के लिए पेरियोडॉन्टाइटिस विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। वे दवाओं की मदद से प्लाक हटाते हैं। जरूरत के अनुसार स्केलिंग और रूट प्लानिंग भी करते हैं। मसूढ़ों की मजबूती के लिए विटामिन-सी से भरपूर चीजें जैसे टमाटर, संतरा, पत्तागोभी और ब्रॉकली खाने की सलाह देते हैं। दिन में दो बार (सुबह व सोने से पहले) ब्रश करने, फ्लॉसिंग और मेडिकेटेड माउथवॉश प्रयोग में लेने के लिए भी कहते हैं।

होम्योपैथी : इस पद्धति में लक्षणों को देखकर इलाज होता है। तेज दर्द के साथ मसूढ़ों के अधिक लाल होने की स्थिति में बेलाडोना दवा देते हैं।

आम धारणा है माउथवॉश से मुंह की बदबू दूर करना
लोगों में धारणा है कि मुंह की बदबू दूर करने के लिए व ब्रश न करने की स्थिति में माउथवॉश फायदेमंद है। मेडिकली देखा जाए तो इनमें ऐसे केमिकल हैं जो अलग-अलग तरीके से काम करते हैं और साइड इफेक्ट छोड़ते हैं। इसलिए डॉक्टरी सलाह से ही इनका प्रयोग करें। वे इसे कब, कैसे और कितने समय के लिए लेना है, के बारे में बताते हैं।

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