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दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में मलेरिया से सर्वाधिक 94 फीसदी मौतें भारत-इंडोनेशिया में

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट : 2021 के मुकाबले 2022 में दुनियाभर के बढ़े आंकड़े

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दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में  मलेरिया से सर्वाधिक 94 फीसदी मौतें भारत-इंडोनेशिया में

दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में मलेरिया से सर्वाधिक 94 फीसदी मौतें भारत-इंडोनेशिया में

जिनीवा. दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में पिछले साल मलेरिया के सबसे ज्यादा मामले और मौतें भारत में दर्ज की गईं। मलेरिया पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में दक्षिण-पूर्व एशिया के नौ देशों में मलेरिया के ज्यादा मामले दर्ज किए गए। करीब 94 फीसदी मौतें भारत और इंडोनेशिया में हुईं।रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में मलेरिया के ज्यादातर मामले भारत में दर्ज किए गए। दुनियाभर में मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले साल दुनिया में मलेरिया के अनुमानित मामले 24.9 करोड़ थे, जो 2019 में कोरोना पूर्व के 23.3 करोड़ से 1.6 करोड़ ज्यादा हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि 2021 के मुकाबले 2022 में मलेरिया के 50 लाख अतिरिक्त मामले सामने आए। पांच देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। पाकिस्तान में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई। वहां 2021 के पांच लाख के मुकाबले 2022 में करीब 26 लाख मामले सामने आए। इथियोपिया, नाइजीरिया, पापुआ न्यू गिनी और युगांडा में भी वृद्धि देखी गई।

जलवायु परिवर्तन ने भी बढ़ाया खतरा

रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई गई। इसमें कहा गया कि तापमान, आर्द्रता और बारिश के पैटर्न में बदलाव मलेरिया फैलाने वाले एनोफिलीज मच्छर के व्यवहार और अस्तित्व को प्रभावित कर सकता है। लू और बाढ़ की घटनाएं भी संचरण और बीमारी बढ़ा सकती हैं।

संवेदनशील क्षेत्र

भारत में हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति बहुत संवेदनशील है। तापमान में वृद्धि के कारण ठंडे क्षेत्र भी मलेरिया और डेंगू के लिए अनुकूल हो गए हैं। ऊंचे पहाड़ों में ज्यादा बारिश और बढ़ते तापमान के कारण संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं। ज्यादा बारिश से पहाड़ी इलाकों में मच्छरों को प्रजनन में मदद मिलती है।

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