टाइफाइड में राहत देता है शहद, अदरक, लौंग का पानी

टाइफाइड में राहत देता है शहद, अदरक, लौंग का पानी

टायफॉइड अक्सर वहां फैलता है जहां साफ-सफाई का ख्याल नहीं रखा जाता है

टायफॉइड खतरनाक बुखार है। इसमें फीवर काफी तेज होता है जो 15, 21 या 27 दिनों तक रह सकता है। ऐसे में टायफॉइड होने पर कुछ खास बातों का ध्यान रखकर न केवल इससे बचाव किया जा सकता है बल्कि इसके असर को भी कम किया जा सकता है। टायफॉइड अक्सर वहां फैलता है जहां साफ-सफाई का ख्याल नहीं रखा जाता है। सही जल आपूर्ति और अपशिष्टों को उचित तरीके से बस्ती से दूर करना इस रोग की रोकथाम के लिए बहुत आवश्यक होता है।आइए जानते हैं इसके बचाव के बारे में :-

टायफॉइड हाेने के कारण ( Typhoid causes )
इसके बैक्टीरिया हमारी छोटी आंत में ही पाए जाते हैं और स्टूल के रास्ते बाहर निकलते हैं। मक्खियां इन्हें फैलाती हैं।मक्खियां खाने की चीजें और पानी को दूषित कर देती हैं। जब दूषित खाना और पानी स्वस्थ्य व्यक्ति उपयोग करता है तो वह भी इससे ग्रसित हो जाता है। दूषित ब्लड चढ़ाने, टायफॉइड के मरीज का तौलिया इस्तेमाल करने और उसका छोड़ा खाना खाने से भी टायफॉइड के संक्रमण का खतरा रहता है।

टायफॉइड के लक्षण ( typhoid fever symptoms )
लगातार तेज बुखार रहना और भूख न लगना, पेटदर्द, सिरदर्द और कमजोरी महसूस होना, अधिक पसीना आना और अधिक सर्दी भी लगना, बच्चों में दस्त और बड़ों में कब्ज की समस्या, कुछ में अल्सर की भी शिकायत।

जांचें :
इसमें ब्लड और स्टूल का कल्चर टैस्ट करते हैं। इससे बैक्टीरिया के प्रकार का पता चलता है। इसी आधार पर इलाज होता है।

ध्यान रखें : मरीज को पीने का पानी उबालकर ही दें और पर्याप्त आराम कराएं। कच्चे फल या सब्जियां खाने को न दें। खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं और नहाने के लिए भी साफ पानी का उपयोग करें। बासी खाना न खाएं। हैल्दी डाइट लें और तेल व चिकनाई से बचें।

टायफॉइड से जुड़े घरेलू नुस्खे ( home remedies for typhoid )
तुलसी-काली मिर्च एकसाथ खाने से आराम मिलता है। गाजर का रस पीना फायदेमंद होता है। रोजाना अदरक और सेब का जूस पीने से इंफेक्शन का असर घटता है। एक कप गर्म पानी में 2-3 चम्मच शहद मिलाकर पीएं। शहद से भी टायफॉइड के बैक्टीरिया मरते हैं। पुदीना-अदरक का जूस पीने से बुखार उतरता है। पानी में लौंग उबालकर उस पानी को रोज पीएं। इससे संक्रमण का खतरा घटता है। गाय का दूध लेना भी फायदमेंद।

इलाज के तरीके
एलोपैथी
इसके बैक्टीरिया गर्मी और बरसात में तेजी से पनपते हैं। ऐसे मौसम में विशेष सावधानी बरतें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें। शरीर पर लाल दानों के साथ बुखार आने पर डॉक्टर को दिखाएं। इसमें बैक्टीरिया को मारने के लिए 14 दिनों तक एंटीबायोटिक्स दी जाती है। बचाव के लिए ओरल और इंजेक्शन के रूप में टीके उपलब्ध हैं।

आयुर्वेद
इसे आयुर्वेद में संतत ज्वर कहते हैं। इसमें शरीर पर मोती के आकार के दाने निकल आते हैं इसलिए कुछ लोग मोतीझारा भी कहते हैं। यह वात और पित्त दोनों ही कारणों से होता है। इसलिए इसमें मरीज को हल्का और तरल भोजन खाने की सलाह दी जाती है। मूंग की दाल, दाल का पानी, चीकू, पपीता, अनार आदि खाने को कहा जाता है। दूध में मुनक्का उबालकर पीना चाहिए।

होम्योपैथी
इसमें सामान्य बुखार की तुलना में अलग तरह का बुखार आता है। इसके बुखार में पल्स रेट कम हो जाती है जबकि दूसरे प्रकार के फीवर में पल्स तेज होती है। इसमें लक्षणों के साथ इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी दवा देते हैं ताकि शरीर बीमारी के खिलाफ खुद लड़ सके। बुखार उतरने के बाद भी इसके असर दिखते हैं। इनमें बाल गिरना, हड्डियों में दर्द और कमजोरी आम समस्या है।

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