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जन्म के समय शिशु न रोए तो इस रोग का हो सकता है खतरा

जन्म के समय रोने से बच्चे के शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन जाती है जिससेे उसके मस्तिष्क का विकास होता है। यदि बच्चा जन्म के समय देरी से रोता है तो उसके दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।

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दिमागी गड़बड़ी बताती है सीएफएम
सेरेब्रल फंक्शन मॉनीटर से जन्मजात मिर्गी समेत दिमागी विकृतियों का मिनटों में पता चलता है। अब तक इन रोगों का इलाज लक्षणों के आधार पर होता था। इस मशीन में पांच इलेक्ट्रोड होते हैं। चार शिशु के सिर और एक गर्दन पर लगाया जाता है। जिससे दिमाग के संकेत मशीन तक पहुंचते हैं और मॉनीटर पर दिखते हैं।
जब बच्चा नहीं रोता
जन्म के समय रोने से बच्चे के शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन जाती है जिससेे उसके मस्तिष्क का विकास होता है। अगर कोई बच्चा जन्म के समय देरी से रोता है तो उसके दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऐसे शिशुओं में मानसिक विकृति की आशंका बढ़ जाती है। ये शिशु हाई रिस्क श्रेणी में आते हैं। ऐसे में सीएफएम मशीन से रोने का पता कर इलाज किया जाता है।
जन्मजात मिर्गी
यदि बच्चे में आनुवांशिक रूप से मिर्गी की समस्या हो या सिर का आकार बड़ा हो तो भी इस मशीन की मदद से रोग की जांच की जाती है। इस मशीन से एक माह से कम आयु के बच्चों के रोगों का पता चलता है।
सुनने की क्षमता जांचती है इको स्क्रीन मशीन
इको स्क्रीन मशीन से नवजात शिशुओं में सुनने की क्षमता का पता लगाया जाता है। अगर शिशु सुनने में अक्षम है तो वह न तो कुछ समझ पाएगा और न ही भविष्य में बोल पाएगा। इसलिए छह माह के अंदर शिशुओं की जांच करानी चाहिए। इको स्क्रीन मशीन में दो स्पीकर और तीन इलेक्ट्रोड होते हैं। स्पीकर को बच्चे के कान और इलेक्ट्रोड को सिर पर लगाकर मशीन से आवाज दी जाती है। अगर बच्चा सुनने में सक्षम है तो उसका दिमाग सक्रिय हो जाता है। लेकिन असक्षम होने पर बच्चे का इलाज ईएनटी सर्जन करते हैं। कई मामलों में कान के पर्दे ठीक किए जाते हैं तो कुछ में हियरिंग मशीन लगाई जाती है।
डॉ. अशोक गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ

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