6 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अगर कम पानी पीते हैं तो जान लें ये जरूरी बातें

नेचुरोपैथी एवं एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ बता रही हैं मौसम के अनुसार पानी पीने की सही मात्रा, पीने का सही तरीका व महत्व के बारे में।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Vikas Gupta

Mar 06, 2019

if-you-drink-less-water-then-know-these-things

नेचुरोपैथी एवं एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ बता रही हैं मौसम के अनुसार पानी पीने की सही मात्रा, पीने का सही तरीका व महत्व के बारे में।

पानी हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। लेकिन यह आम धारणा है कि दिनभर में आठ गिलास पानी पीना जरूरी होता है। जबकि वास्तविकता यह है कि शरीर को मौसम व व्यक्ति विशेष की दिनचर्या के हिसाब से भी पानी की जरूरत होती है। ऐसे में जानना बेहद जरूरी होता है कि व्यक्ति को मौसम और शरीर की जरूरत के हिसाब से कितना पानी पीना चाहिए। नेचुरोपैथी एवं एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ बता रही हैं मौसम के अनुसार पानी पीने की सही मात्रा, पीने का सही तरीका व महत्व के बारे में।

दिन व रात की सही मात्रा -
सर्दी व बरसात के मौसम में हर किसी के लिए कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना जरूरी है। गर्मियों में शरीर का तापमान बढ़ जाता है इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए कम से कम 15 गिलास पानी पीना चाहिए। देर रात तक जागने पर 11 बजे के बाद हर घंटे में कम से कम डेढ़ गिलास पानी पिएं वर्ना वात, पित्त व कफ संबंधी रोग होने का खतरा रहता है।

खाने के बाद -
खाने के करीब दो घंटे बाद सामान्य पानी तीन घूंट में पिएं और प्रत्येक घूंट के बाद सांस लें। खाने के बाद पेट में खाना पचने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। उस समय पेट में ऊष्मा होती है जो पानी पीने से शांत हो जाती है और पाचनक्रिया धीमी पड़ जाती है। अधिक चिकनाई व मसालेदार भोजन के बाद गर्म पानी को चाय की तरह सिप लेते हुए पीना चाहिए। इससे गरिष्ठ भोजन को पचाने में आसानी रहती है। पानी को हमेशा बैठकर पिएं क्योंकि खड़े होकर पानी पीने से घुटने कमजोर हो जाते हैं।

पेट में एसिड बनता है -
अक्सर लोग खाने के बाद पानी में नींबू डालकर पानी पीते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पेट में एसिड बनता है। अल्सर या एसिडिटी के मरीजों के लिए भी नींबू का प्रयोग उचित नहीं माना जाता है।

बढ़ता है कमर का घेरा -
शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचना बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी होने पर व्यक्तिको शरीर में अकड़न, सिरदर्द, एसिडिटी व किडनी संबंधी बीमारियां होने की आशंका रहती है। कम पानी होने पर मस्तिष्क शरीर को संकेत देता है कि बॉडी में मौजूद पानी को पेट में ही रोक दे। इससे रुका हुआ पानी शरीर में अपना काम करना बंद कर देता है और व्यक्तिका पेट भी बाहर आ जाता है। इस तरह कम पानी पीना मोटापे की एक वजह बन जाता है।

खाने के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि भोजन में कई तरह के मसाले होते हैं जो इस धातु के साथ रिएक्शन कर फूड पॉइजनिंग, उल्टी व सिरदर्द की समस्या कर सकते हैं।

दिनभर में कई बार भोजन को थोड़ा-थोड़ा करके लेने से बचें। ऐसा करने से पानी पीने का क्रम भी प्रभावित होता है। दिन में तीन बार ठीक तरह से खाना चाहिए। हर बार खाने के बीच कम से कम चार घंटे का अंतराल दें। पानी दो घंटे के बाद पिएं। चिकनाई युक्तव मसालेदार भोजन के एक से डेढ़ घंटे बाद अधिक पानी का सेवन करें।

पूरे दिन में एक-एक घंटे के अंतराल पर पानी पिएं। सर्दी व बरसात में प्यास कम लगे तो भी गिनकर आठ से दस गिलास पानी पिएं।
अगर मोटापा कम करना चाहते हैं तो पानी को गर्म करके चाय की तरह सिप लेते हुए पिएं। जिन्हें किडनी संबंधी समस्या हो उन्हें सामान्य लोगों से कम पानी पीना चाहिए। ऐसे व्यक्तिविशेषज्ञ की सलाह से ही पानी की मात्रा तय करें।

बड़ी खबरें

View All

रोग और उपचार

स्वास्थ्य

ट्रेंडिंग

लाइफस्टाइल