इरिटेबल बाउल सिंड्रोम : दिमाग में नकारात्मक विचार आने से खराब होता है पाचनतंत्र

तनाव, अनिद्रा व नशे का आंतों पर होता है असर, यह अवस्था आईबीएस कहलाती है। आइये जानते हैं इसके बारे में ।

आईबीएस यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम पाचनतंत्र से जुड़ी आम समस्या है। इसकी एक बड़ी वजह तनाव या अन्य कारणों से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होना है। जब दिमाग में नकारात्मक विचार आते हैं तो आंतों पर असर होता है जिससे पेटदर्द व कब्ज की शिकायत होती है। हालांकि व्यक्ति जब नींद लेता है तो उसे इन लक्षणों का अहसास नहीं होता। खास बात है कि जब मरीज इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचता है तो कई जांचों के बाद भी रोग का पता नहीं चलता। यह अवस्था आईबीएस कहलाती है। आइये जानते हैं इसके बारे में ।

लक्षण -
पेटदर्द, ऐंठन, आंतों का काम बंद होना, दस्त, तनाव, कब्ज, नींद की कमी व एसिडिटी आईबीएस के प्रमुख लक्षण हैं।
पेट का ठीक से साफ न होना व खट्टी डकारें आना।
जी मिचलाना और दिन में बार-बार मल त्याग की इच्छा होना।
गंभीर स्थिति (60प्रतिशत मामले) में बुखार आना और खून की कमी।
शरीर में पानी की कमी और अपच।

कई कारणों से तकलीफ -
स्वस्थ व्यक्ति की आंतों का संतुलन अचानक बिगड़ने का कारण तनाव, अनिद्रा और नशा प्रमुख वजह हैं। जठराग्नि के गड़बड़ाने से भी व्यक्ति के दिमाग में वहम की स्थिति बनी रहती है और वह खुद को रोगी मानने लगता है। कुछ मामलों में आईबीएस के कारण सिरदर्द, कमरदर्द, जोड़ों व सीने में दर्द होता है। अप्रत्यक्ष रूप से ऐसा एसिडिटी के कारण भी हो सकता है।

ये खाएं: पुराने चावल, तुरई, लौकी, अनार, मूंग की दाल, ज्वार, सौंठ, कालीमिर्च, अदरक, लस्सी, धनिया, पुदीना, इलायची व जीरा विभिन्न तरह से प्रयोग में लें।

न खाएं: मक्के की रोटी, आलू, कद्दू, जिमिकंद, अनानास, लोबिया, राजमा, प्याज, बेसन आदि से बनी चीजों को कम या न के बराबर ही खाएं।

इलाज -
आईबीएस का इलाज लक्षणों के आधार पर होता है। प्लेसिबो तकनीक से रोगी का इलाज करते हैं। इसमें मरीज को दिमागी कार्यप्रणाली सुचारू करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। पेट में दर्द, ऐंठन, कब्ज या दस्त, बुखार आदि समस्याओं में दवाएं दी जाती हैं। साथ ही शरीर में पानी की कमी होने पर इंट्रावेनस फ्लूड बाहरी रूप से देते हैं। दिमाग को तंदुरुस्त रखने के लिए ओमेगा-३ फैटी एसिड युक्त चीजें खाने और मेडिटेशन आदि करने की सलाह देते हैं।

सावधानी बरतें -
तनाव से बचें, इसके लिए नियमित योग और व्यायाम करें।
कैफीन युक्त चीजें जैसे चाय, कॉफी या सॉफ्ट ड्रिंक्स न लें।
खानपान पर विशेष ध्यान दें, रोजाना 8 -9 गिलास पानी पीएं।
कब्ज के कारण वाले पदार्थ जैसे शराब-सिगरेट से दूर रहें।
फाइबरयुक्त फूड जैसे केला, सेब, गाजर आदि खाएं।
तलाभुना व मसालेदार भोजन न करें।
फूलगोभी, पत्तागोभी और मिर्च न खाएं।
मानसिक रूप से यदि कोई तनाव, अवसाद का रूप ले रहा है तो परिवार के सदस्यों और दोस्तों से बात साझा करें।

आयुर्वेद-
आयुर्वेद में इस रोग को गृहणी दोष कहते हैं। इसमें रोगी को किसी प्रकार का गंभीर रोग होने की आशंका रहती है। कच्चे बील का चूर्ण, नमकीन छाछ (भुना जीरा, काला नमक व पुदीना मिली हुई), पीने से फायदा होता है। ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा का प्रयोग उपयोगी है। मेडिटेशन, शवासन व प्राणायाम करने से राहत मिलती है।

Show More
विकास गुप्ता
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned