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मोनोटनी यानी उबाउपन या एकरुपता। कभी आपको लगता है कि आपके जीवन में मोनोटनी हावी होती जा रही है, जिससे शरीर की आदतें बिगड़ती जा रही हैं। जरा चैक कर लेते हैं। कुछ सवालों के जवाब आपकी समस्या को दूर करने में आपकी मदद करेंगे।
1. आपका काम/दिनचर्या ही ऐसा है कि उसमें नया करने की संभावना नहीं है ?
अ: हां, रूटिन जॉब में तो नियमों और सेट पैटर्न से बंधा रहना पड़ता है।
ब: नहीं, मैं कोशिश करके कुछ नया करता हूं ताकि ताजगी बने रहे।
2. आपकी मोनोटनी और उसके कारणों की बड़ी वजह स्वयं की न बदलने की आदते हैं?
अ: हां, कुछ आदते हैं जिन्हें चाहकर भी बदल नहीं सकते।
ब: नहीं, मैं बदलाव की छोटी कोशिशें करता/करती रहती हूं।
3. आप उन लोगों में से हैं जो अपने रूटीन को बदलने से डरते और झिझकते हैं ?
अ: हां, बदलाव के मेरे अनुभव बुरे रहे हैं और वाकई डर लगता है।
ब: नहीं, मैं आत्मविश्वास से हर संभव कोशिश करता/करती हूं।
4. आप केवल टीवी, इंटरनेट को मोनोटनी दूर का जरिया मानते हैं ?
अ: अब इतनी भागदौड़ में जैसा इंटरनेट मिले, जहां मिले दिल बहलाना पड़ता है।
ब: नहीं, मुझे वर्चुअल की जगह रिअल व हैल्दी इंटरनेटनमेंट पसंद है।
5. कुछ भी नया करने का मौका हो तो आप तनाव में आकर गड़बड़ कर जाते हैं ?
अ: हां, कई बार चैलेंज ऐसे होते हैं कि पैर पीछे करना पड़ते हैं।
ब: नहीं, मैं कॉन्फीडेंस के साथ आगे बढऩे की राह तलाशता/तलाशती हूं।
६. हफ्तेभर में कोई एक या दो दिन होते हैं जब आप खुश रहते हैं या सुकून महसूस करते हैं?
अ: हां, प्रोफेशनल-सोशल कमिटमेंट पूरी करने में खुद के लिए वक्त नहीं मिलता।
ब: नहीं, मैं कुछ भी करके अपनी बेसिक वैल्यूज को मैंटेन करता/करती हूं।
स्कोर और एनालिसिस
आप मोनोटनी के शिकार हैं: यदि आपका स्कोर है ४ या उससे कम अंक तो यकीनन आप उबाउपन यानी मोनोटनी के शिकार हैं। इसका निदान किसी डॉक्टर की बजाय आपके स्वयं के हाथ मेंं है। अपने रूटिन को बैलेंस रखकर कुछ क्रिएटिव करने की छोटी-छोटी कोशिशें कीजिए। खुद को पॉजिटिवली बदलिए, आपको मोनोटनी के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे और खुश रहना सीख जाएंगे।
आप मोनोटनी पर भारी हैं: ४ या उससे ज्यादा यदि यह आपका स्कोर है तो आपको समझ है कि एक जैसा काम आपके स्किल सेट को बढ़ाता है और एक्सपर्ट बनाता है लेकिन उसमें पॉजिटिव चेंज लाना जरूरी है। आपकी ईमानदार कोशिशें, अनुशासन और नया करने की जिद आपको कई दिमागी उलझनों से उबार लेती है इसलिए आपका एनाटॉमी भी ठीक रहती है। नया करते रहिए।
Published on:
26 Apr 2018 04:49 am
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