12 जून 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गर्भाशय विकृत होने के कारण होती है बार-बार गर्भपात की समस्या

ज्यादातर मामलों में गर्भाशय की विकृति का पता गर्भधारण के बाद, शिशु के ठीक से विकसित न होने या फिर बार-बार गर्भपात होने के बाद चलता है।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Vikas Gupta

Jul 26, 2019

know-about-mullerian-anomalous

ज्यादातर मामलों में गर्भाशय की विकृति का पता गर्भधारण के बाद, शिशु के ठीक से विकसित न होने या फिर बार-बार गर्भपात होने के बाद चलता है।

गर्भपात या समय पूर्व डिलीवरी का एक कारण गर्भाशय के आकार का असामान्य होना या इसमें किसी तरह की परेशानी का होना हो सकता है। मेडिकली इसे मुलेरियन एनोमलीज कहते हैं। ज्यादातर मामलों में गर्भाशय की विकृति का पता गर्भधारण के बाद, शिशु के ठीक से विकसित न होने या फिर बार-बार गर्भपात होने के बाद चलता है। कुछ मामलों में गर्भाशय का विकृत होना जन्मजात हो सकता है और कई बार उम्र बढऩे के साथ भी इससे जुड़ी परेशानियां सामने आती हैं।

कारण -
गर्भाशय के आकार में बदलाव यानी आमतौर पर त्रिकोणाकार के बजाय अन्य आकार, इसमें कोई गांठ का होना, बच्चेदानी का मुंह खुला रहना, बच्चेदानी की टीबी, अंडाशय का अलग-अलग विकसित होना आदि प्रमुख वजह हैं। कभी कभार गर्भ के बढऩे के दौरान भी गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। कुछ परिस्थितियों में मुलरियन एनोमलीज की स्थिति गर्भाशय के एक के बजाय दो होने पर भी दिखती है।

लक्षण-
जन्मजात गर्भाशय की विकृति हो तो बिना गर्भधारण के भी पेटदर्द, यूरिन करते समय तकलीफ, अत्यधिक माहवारी या असहनीय दर्द होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भपात, समय पूर्व प्रसव, गर्भस्थ शिशु की पोजीशन सही न होने, अंदरुनी गर्भाशय के विकास में रुकावट व इंफर्टिलिटी की आशंका होती है। वहीं जिनमें युवावस्था के दौरान विकृति होती है उनमें पीरियड्स के दौरान तेज दर्द व अधिक रक्तस्त्राव होता है।

जांचें -
गर्भाशय की स्थिति जानने के लिए सबसे पहले रोगी से उसकी हिस्ट्री पूछते हैं। एक्सरे और सोनोग्राफी कर गांठ का पता लगाते हैं। वहीं गर्भाशय के अंदर यदि कोई झिल्ली होती है तो हिस्टेरोस्कोपी करते हैं।

इलाज - गांठ या झिल्ली की स्थिति में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। बच्चेदानी का मुंह खुला होने की स्थिति में गर्भ ठहरने के 14 हफ्ते बाद मुंह को टांके लगाकर सील देते हैं। जिन्हें 9वें माह में खोल दिया जाता है।

यदि दो बच्चेदानी हो तो किसी एक में रुकावट होने पर माहवारी के दौरान ब्लड इकट्ठा होने से गांठ बन सकती है।

बड़ी खबरें

View All

रोग और उपचार

स्वास्थ्य

ट्रेंडिंग

लाइफस्टाइल