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जान लें आंशिक घुटना प्रत्यारोपण के बारे में

घुटने का जोड़ दो तरह के जोड़ों से मिलकर बनता है।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Mar 09, 2019

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घुटने का जोड़ दो तरह के जोड़ों से मिलकर बनता है।

घुटने के जोड़ पर शरीर का सर्वाधिक भार पड़ता है, यह मानव शरीर का बेहद महत्वपूर्ण जोड़ होता है। घुटने का जोड़ तीन हड्डियों के मिलने से बनता है - पहली जांघ की हड्डी, दूसरी टांग के निचले हिस्से की बड़ी हड्डी व तीसरी जानुफलक (पटेला) या घुटने के जोड़ को ढकने वाली हड्डी। इन तीनों हड्डियों के अंतिम छोर गद्दियों जैसे उपास्थियों (जिन हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा कम होती है व उनमें लचक होती है) से ढके रहते हैं। ये गद्दियां चलने-फिरने और अन्य शारीरिक क्रियाओं के दौरान जोड़ की हड्डियों के आपसी घर्षण को रोकती हैं व चोट या आघात को सहन कर लेती हैं।

आंशिक घुटना प्रत्यारोपण -
घुटने का जोड़ दो तरह के जोड़ों से मिलकर बनता है। पहला जांघ की हड्डी व पांव के निचले हिस्से की हड्डी का जोड़ व दूसरे घुटने के जोड़ को ढकने वाली हड्डी को जांघ की हड्डी से जोडऩे वाला जोड़। जब यह जोड़ ओस्टियो आर्थराइटिस, चोट या अन्य किसी वजह से पूर्णत: क्षतिग्रस्त हो जाता है तो रोग मुक्ति के लिए पूर्ण जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी का विकल्प होता है। इस प्रक्रिया द्वारा कुशल जोड़-प्रत्यारोपण विशेषज्ञ रोगी के जोड़ में क्षतिग्रस्त उपास्थियों को हटाकर कृत्रिम जोड़ प्रत्यारोपित करते हैं। लेकिन जब जोड़ के विभिन्न हिस्सों में से कोई एक हिस्सा खराब हो जाता है तो शल्य चिकित्सक आंशिक घुटना जोड़-प्रत्यारोपण शल्य क्रिया को विकल्प के तौर पर चुनते हैं।

क्षतिग्रस्त हिस्से में बदलाव -
आंशिक जोड़-प्रत्यारोपण शल्य-चिकित्सा को समझने के लिए घुटने के जोड़ को तीन हिस्सों में बांटकर समझा जा सकता है:-घुटने के जोड़ का मध्य हिस्सा, घुटने के जोड़ का बाहरी हिस्सा और जोड़ को ढकने वाली हड्डी यानी जानुफलक का पिछला हिस्सा। इन हिस्सों में से जब केवल कोई एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है तो जोड़-प्रत्यारोपण विशेषज्ञ आंशिक घुटना प्रत्यारोपण शल्य क्रिया का सहारा लेते हैं। यह सर्जरी विशेषज्ञ द्वारा घुटने के जोड़ पर सामने की तरफ से केवल एक छोटा सा चीरा लगाकर की जाती है। इस सर्जरी में घुटने के जोड़ के क्षतिग्रस्त हो चुके हिस्से को हटाकर नया कृत्रिम हिस्सा प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान घुटने के जोड़ के स्वस्थ हिस्से को न छेड़ते हुए केवल क्षतिग्रस्त भाग को ही छीलकर हटाया जाता है और उसकी जगह नया कृत्रिम जोड़ अवयव (इंप्लांट पार्ट) लगा दिया जाता है।

इस सर्जरी के लाभ -
आंशिक घुटना जोड़-प्रत्यारोपण शल्य क्रिया में अस्थि-बंधक तंतु संरक्षण तकनीक द्वारा किया जाता है यानी इस पूरी सर्जरी में किसी भी अस्थि-बंधक तंतु को नहीं छेड़ा जाता है। यही इस ऑपरेशन का सबसे बड़ा लाभ है यानी इस सर्जरी के बाद मरीज को जोड़ में किसी कृत्रिमता का अहसास नहीं होता।

बेहतर विकल्प -
50 वर्ष की उम्र तक के मरीज और ऐसे युवा जिनके घुटने के जोड़ का केवल कोई एक हिस्सा चोट या किसी अन्य वजह से खराब हो गया हो उनके लिए आंशिक घुटना जोड़ प्रत्यारोपण शल्य क्रिया बेहतर विकल्प है। इसके परिणाम शत-प्रतिशत होते हैं। इस जोड़ अवयव की आयु लगभग 20 वर्ष होती है। इस सर्जरी को आजकल 45-50 वर्ष की वे महिलाएं ज्यादा करा रही हैं जिनके घुटनों में दर्द की समस्या रहती है। इस सर्जरी में व्यक्ति के घुटने के आगे व पीछे के लिगामेंट में किसी प्रकार का कोई चीरा नहीं लगता जिसकी वजह से मरीज 15-20 दिन के बाद सभी प्रकार की गतिविधियां कर सकता है। इस सर्जरी में मरीज को एक दिन के लिए अस्पताल में भर्ती रखा जाता है।

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