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Salt therapy: श्वसन रोग के लिए फायदेमंद है सॉल्ट थैरेपी, जानें इसके बारे में

Salt therapy: साइनुसाइटिस, एलर्जी, अस्थमा व श्वास संबंधी रोगों में यह थैरेपी उपयोगी है। रोग की स्थिति के अनुसार नमक के दाने का आकार तय करते हैं।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Aug 31, 2019

Salt therapy: श्वसन रोग और संक्रमण के लिए फायदेमंद है सॉल्ट थैरेपी, जानें इसके बारे में

साइनुसाइटिस, एलर्जी, अस्थमा व श्वास संबंधी रोगों में यह थैरेपी उपयोगी है। रोग की स्थिति के अनुसार नमक के दाने का आकार तय करते हैं।

सॉल्ट थैरेपी या हेलोथैरीपी, दवा रहित व नैचुरल थैरेपी है। इसमें व्यक्ति को नमक की दीवारों व फर्श के बीच रखते हैं। इस नमक को रोगी की बॉडी धीरे-धीरे अवशोषित करती है। साइनुसाइटिस, एलर्जी, अस्थमा व श्वास संबंधी रोगों में यह थैरेपी उपयोगी है। रोग की स्थिति के अनुसार नमक के दाने का आकार तय करते हैं।

नमक में ये गुण -
थैरेपी में प्रयोग हुए नमक में कैल्शियम, सोडियम व मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं। व्यक्ति की उम्र और स्थिति के अनुसार थैरेपी की समय अवधि तय करते हैं। रोग की एक्यूट अवस्था में इसे प्रयोग में नहीं लेते हैं।

कई हैं फायदे :
थैरेपी लेने के दौरान नमक के कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचते हैं जिससे संक्रमण के साथ समस्या में राहत मिलती है।
इस थैरेपी का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। त्वचा संबंधी, टॉन्सिलाइटिस या फायब्रॉइड्स की समस्या में भी यह लाभदायक है।
45 मिनट की इस थैरेपी में कमरे में नमी और तापमान (18-22 डिग्री सेल्सियस) समुद्री स्थान जैसा होता है।
गर्भवती महिलाएं भी इसका फायदा उठा सकती हैं।
सॉल्ट थैरेपी के बाद व्यक्ति ताजगी महसूस करता है।
त्वचा पर होने वाले छोटे-मोटे निशान दूर होने के बाद त्वचा चमकदार बन जाती है।

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