
मसूड़ों से जुड़ी आम समस्या बनता जा रहा है पायरिया। इसमें रोगी को मसूड़ों में सूजन, लालिमा, दर्द, इसके साथ रक्त या पस का आना, दांतों में दर्द आदि तकलीफें होती हैं।
मसूड़ों से जुड़ी आम समस्या बनता जा रहा है पायरिया। इसमें रोगी को मसूड़ों में सूजन, लालिमा, दर्द, इसके साथ रक्त या पस का आना, दांतों में दर्द आदि तकलीफें होती हैं। इसके कई प्रमुख कारण हो सकते हैं। जैसे जिंजिवाइटिस की बढ़ती स्थिति, मुंह से जुड़ी साफ-सफाई और सेहत का खयाल न रखना, लंबे समय से दांतों पर कैविटी की कठोर परत जमना, कई तरह के हार्मोनल बदलाव, कुछ बीमारियों के कारण भी दिक्कत होती है जैसे डायबिटीज, एड्स आदि। आयुर्वेद में उपचार के रूप में सबसे पहले रोग का कारण जाना जाता है।
इसके बाद यदि मसूड़ों से ब्लीडिंग या पस निकलने की समस्या हो तो 2-3 चुटकी फिटकरी लेकर गुनगुने पानी में डालकर उससे गरारे करने की सलाह देते हैं। इसके अलावा मुलैठी और त्रिफला का काढ़ा बनाकर उससे गरारे करना भी फायदेमंद होता है। कई बार आयुर्वेदिक द्रव्यों से मुंह का शोधन कर दूषित रक्त को बाहर निकालकर विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक तेलों से गरारे करने के लिए कहते हैं। स्थिति नियंत्रित होने के बाद कुछ तेलों से मसूड़ों की मालिश करने के लिए कहते हैं। अंत में नस्य कर्म चिकित्सा अपनाते हैं।
Updated on:
01 Oct 2019 07:15 pm
Published on:
01 Oct 2019 07:15 pm
