1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जानें मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम और सच्चाई

शराब या अफीम जैसे पदार्थों के नशे से रोगी कुछ समय के लिए रोग के लक्षणों को भूल अवश्य जाता है लेकिन भविष्य में उसकी बीमारी के लक्षण अधिक तीव्र होकर सामने आते हैं।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Vikas Gupta

Mar 19, 2019

mental-diseases-myths-and-truths

जानें मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम और सच्चाई

शराब या अफीम जैसे पदार्थों के नशे से रोगी कुछ समय के लिए रोग के लक्षणों को भूल अवश्य जाता है लेकिन भविष्य में उसकी बीमारी के लक्षण अधिक तीव्र होकर सामने आते हैं।

भ्रांति : मानसिक रोगों का उपचार केवल बाबाओं व तांत्रिकों द्वारा ही संभव है।
तथ्य : मानसिक रोगों का उपचार तांत्रिकों, बाबाओं आदि के पास नहीं होता, बल्कि वे महज हमारी भावनाओं व आस्था का अनावश्यक फायदा उठाते हैं। सही पहचान और उचित मार्गदर्शन से मनोचिकित्सक मनोरोगों का उपचार करने में सक्षम होता है।

भ्रांति : सभी मानसिक रोगों में उम्रभर दवा लेनी पड़ती है।
तथ्य : बहुत कम रोगियों को लंबे समय तक उपचार लेना पड़ता है। लेकिन मानसिक परेशानी के अलावा ऐसे कई शारीरिक रोग जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा भी हैं जिनमें लंबे समय तक या ताउम्र दवा लेनी पड़ सकती है। रोगी इन बीमारियों की चिकित्सा में खुद को प्रताडि़त महसूस नहीं करता।

भ्रांति : इलेक्ट्रिक शॉक थैरेपी घातक चिकित्सा है। इससे रोगी की याददाश्त चली जाती है।
तथ्य : मानसिक रोगों में दी जाने वाली विद्युत चिकित्सा विधि कुछ प्रकार के गंभीर मनोरोगों जैसे उन्माद व आत्महत्या का विचार रखने वाले अवसाद के रोगियों में आश्चर्यजनक परिणाम लाती है। इस चिकित्सा में व्यक्ति की याददाश्त पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। कुछ रोगी 24-36 घंटे तक के लिए कुछ भूल भले ही सकते हैं। विद्युत चिकित्सा कुछ विशेष प्रकार के मनोरोगों में अत्यधिक प्रभावी व सुरक्षित चिकित्सा है।

भ्रांति : मनोरोगी की संतान भी मनोरोगी ही होती है।
तथ्य : यह पूर्ण सत्य नहीं है। कुछ मनोरोगों में आनुवांशिक कारणों से बच्चों में इसकी आशंका हो सकती है। लेकिन उचित पारिवारिक वातावरण से इससे बचा जा सकता है।

भ्रांति: मनोरोग होने पर व्यक्ति की बुद्धि घट जाती है।
तथ्य : मनोरोग होने पर व्यक्ति की बुद्धि के स्तर में गिरावट नहीं आती, बल्कि उसके विचारों में परिवर्तन आता है। इन्हीं परिवर्तन से वह कुछ अजीब बातें अथवा हरकतें करता है।

भ्रांति : एक बार मनोरोग होने पर रोगी सदैव इससे पीड़ित रहता
है। इसका पूर्ण उपचार संभव नहीं है।
तथ्य : वक्त के साथ मनोचिकित्सा विज्ञान में भी बहुत से परिवर्तन हुए हैं। आज कई तरह की नई औषधियों व चिकित्सा विधियों का विकास हो चुका है, जो मानसिक रोग के मरीज को प्रभावी तरीके से ठीक कर देती हैं।

भ्रांति : अवसाद, अकारण भय (फोबिया), चिंता आदि में शराब, अफीम आदि का सेवन रोग से मुक्ति दिलाता है।
तथ्य : इन पदार्थों से नशा करने के कारण रोगी चिंता के लक्षण कुछ समय के लिए अवश्य भूल जाता है लेकिन भविष्य में यह लक्षण और अधिक तीव्र होकर उभरते हैं। जिसे रोगी पुन: अधिक सेवन करके ठीक करने का प्रयास करता है। इस प्रकार मरीज धीरे-धीरे अपने मनोरोगों के अलावानशे का रोगी भी बनने लगता है।

भ्रांति : यदि परिवार के एक सदस्य को मानसिक रोग हो जाए तो घर के अन्य लोगों को भी हो जाता है।
तथ्य : मनोरोग कोई संक्रामक रोग नहीं है जो एक व्यक्तिको होने पर दूसरे को भी हो जाए। यह व्यक्तिमें आनुवांशिक, दूषित वातावरण के प्रभाव तथा जीवन में घटित दबावपूर्ण व तनावपूर्ण घटनाओं के मिले-जुले प्रभाव के कारण होता है।

भ्रांति : अत्यधिक लाड़-प्यार व रोगी को कुछ न कहने से वह ठीक हो जाता है।
तथ्य : दोनों ही प्रकार के व्यवहार मनोरोगी के लिए सही नहीं होते। इसके लिए जरूरी है कि परिवार वाले मनोरोगी के साथ सामान्य व्यवहार अपनाएं।


बड़ी खबरें

View All

रोग और उपचार

स्वास्थ्य

ट्रेंडिंग

लाइफस्टाइल