Health News: डेंगू और चिकनगुनिया में ही नहीं, इन बीमारी में भी घटती हैं प्लेटलेट्स

Health Tips: चिकनगुनिया व डेंगू फ्लू की तरह ही स्क्रब टायफस के मामले भी काफी देखने को मिलते हैं।

By: Deovrat Singh

Published: 28 Sep 2021, 11:14 PM IST

Health Tips: चिकनगुनिया व डेंगू फ्लू की तरह ही स्क्रब टायफस के मामले भी काफी देखने को मिलते हैं। यह एक तरह का संक्रामक रोग है जो पिस्सू या माइट के काटने से फैलता है। इनकी संख्या बारिश के मौसम या इसके बाद झाडिय़ों व घास के बढऩे से ज्यादा हो जाती है। रोग की गंभीर अवस्था में रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती हैं। लक्षण डेंगू, चिकनगुनिया से मिलते-जुलते हैं।

ऐसे फैलता है
पिस्सू के काटने से फैलता है यह रोग। इस दौरान पिस्सू की लार में मौजूद बैक्टीरिया (ओरेंसिया सुसुगामुशी) त्वचा के जरिए रक्त में मिलकर विभिन्न अंगों में पहुंचता है। ऐसे में लिवर, दिमाग और फेफड़े सबसे पहले प्रभावित होते हैं। गंभीर स्थिति में शरीर के कई अन्य अंग काम करना बंद कर देते हैं। यह रोग छूने, खांसने के दौरान सांस के माध्यम से नहीं फैलता। पहाड़ी इलाके, जंगल व खेतों के आसपास और बारिश के बाद इन पिस्सुओं की संख्या बढ़ जाती है।

Read More: स्वस्थ दिमाग और सेहतमंद बने रहने के लिए जंकफूड व मोबाइल से बनाएं दूरी, जानें कैसे

लक्षणों को पहचानें
पिस्सू के काटने के दो हफ्ते में मरीज को तेज बुखार आता है। जो १०२-१०३ डिग्री फारेनहाइट तक जा सकता है। शरीर पर लाल दाने और काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान उभरता है। सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी रहती है। ये लक्षण सामान्यत: पिस्सू के काटने के 5-14 दिन तक बने रह सकते हैं। इलाज में देरी से रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। रोग की गंभीर स्थिति में प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है।

प्लेटलेट्स
घटने से शरीर के किसी भी अंग में अंदरुनी तौर पर रक्तस्त्राव की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में संक्रमण शरीर के विभिन्न हिस्सों में फैल सकता है। यह स्थिति मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है।

Read More: बच्चों के लिए बेहद जरुरी है 'मेडिटेशन', यहां जानें पूरी डिटेल्स

रोग की पहचान
पिस्सू बेहद छोटा होता है जिसकी पहचान कर बचाव करना मुश्किल है। पिस्सू के काटने के निशान को देखकर ही रोग की पहचान होती है। ब्लड टैस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर की जांच करते हैं। एलाइजा टैस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेंस टैस्ट भी करते हैं। इसके अलावा एंटीबॉडी टाइटर, सेरोलॉजिकल टैस्ट और पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

अधिक खतरा
पहाड़ी इलाके, जंगल, गांव व शहर में रहने वाले वे लोग जिनके घर के आसपास बारिश के कारण जंगली पौधे या अत्यधिक घास उग गई हो। उन्हें पिस्सू के काटने का अधिक खतरा रहता है। साथ ही खेतों में काम करने वाले किसान जो फसल वगैरह के अधिक संपर्क में आते हैं, वे भी ज्यादा प्रभावित होते हैं।

Read More: वजन को नियंत्रित रखने के लिए खाएं ये कैलारी फ्रूट्स

ध्यान रखें
घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। इनमें मच्छरों के अलावा कई सूक्ष्म कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है।
पानी की टंकियों की सफाई नियमित तौर पर करें।
घर के आसपास घास या पेड़ पौधों की छंटनी करते रहें। ताकि इनके कारण कीड़े आदि की संख्या न बढ़ सके।
पिस्सुओं के काटने का असर सबसे ज्यादा और तेज, कमजोर इम्युनिटी वालों पर होता है। ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को दवाओं के बजाय संतुलित भोजन लें। खाने में ऐसी चीजें शामिल करें जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए।

Deovrat Singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned