रात को बार-बार खुलती है नींद तो ना करें नजरअंदाज

रात को बार-बार खुलती है नींद तो ना करें नजरअंदाज

अगर रात को बार-बार आपकी आंख खुल जाती है या अचानक रात को उठ जाते हैं और फिर अगले दिन नींद की झपकियां लेते रहते हैं

अगर रात को बार-बार आपकी आंख खुल जाती है या अचानक रात को उठ जाते हैं और फिर अगले दिन नींद की झपकियां लेते रहते हैं और सुस्ती महसूस करते हैं तो इन लक्षणों के प्रति लापरवाही न बरतें। नींद में लगातार खलल पड़ना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। नींद से जुड़ी इस समस्या को ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) कहते हैं। इसके प्रति लोगों में जागरुकता की कमी है और वह समझ नहीं पाते कि मोटापा, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी मेटाबॉलिक बीमारियों का एक कारण ओएसए भी हो सकता है। भारत में इस परेशानी से लगभग एक करोड़ लोग प्रभावित हैं और दिनचर्या की गड़बड़ी समझते हुए लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं।

मोटापा भी है कारण
विशेषज्ञाें के अनुसार रोगी को लगातार सोते समय नाक के ऊपरी जोड़ के आसपास रुकावट महसूस होती है तो यह ओएसए की ओर इशारा करता है इसमें व्यक्ति खर्राटे लेने के अलावा बार-बार नींद टूटने और दिनभर नींद आने की शिकायत करता है। रोग के वैसे तो कई कारण हैं लेकिन मोटापा प्रमुख वजह माना जाता है। मोटापे से ग्रस्त लोगों में ओएसए के मामले 30 फीसदी तक पाए गए हैं तो अधिक वजनी लोगों में यह 50-98 फीसदी तक है। इसकी वजह है फैट ऊपरी एयरवेज में रुकावट बनता है जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

एयरवे प्रेशर थैरेपी
नींद न आने की समस्या को रोकने में कंटिन्युअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर थैरेपी (सीपीएपी) अपनाई जा सकती है। इस थैरेपी में एक विशेष मशीन को नाक से बाहरी तौर पर जोड़ देते हैं। यह मशीन थोड़ी-थोड़ी देर में धीरे-धीरे हवा को नाक में डालती रहती है। इसकी मदद से रोगी के नाक में होने वाली रुकावट खुल जाती है और वह आसानी से सांस ले पाता है।

ऑक्सीजन में कमी
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) में प्रकाशित स्टडी के अनुसार अधिक वजन, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मामले नॉन ओएसए लोगों में 48 प्रतिशत और ओएसए के मरीजों में 79 फीसदी पाए गए। विशेषज्ञ के अनुसार स्लीप एप्निया में सोते समय रोगी का ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और इससे दिमाग के सूक्ष्म कण गहरी नींद में सोए रोगी की नींद में बाधा उत्पन्न करते हैं। इससे ब्लड शुगर का स्तर तेज होने के साथ डायबिटीज जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। हार्मोन्स में गड़़बड़ी से भी दिक्कत होती है।

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