
नवजात को थायरॉइड की बीमारी से बचाएं
कॉन्जेनिटल हाइपोथायरायडिज्म दुनियाभर में लगभग चार हजार नवजात शिशुओं में से एक को प्रभावित करता है। भारत में यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि यहां प्रति 1,172 शिशुओं में से एक बच्चा इससे ग्रसित है। यह समस्या थायरॉइड हार्मोन की कमी से होती है।
नवजात शिशुओं में थायरॉइड हार्मोन दिमागी विकास और संपूर्ण वृद्धि के लिए जरूरी है, इसके बिना उनका दिमागी आैर शारीरिक विकास रूक सकता है। बच्चे को देखने से इस कमी का पता नहीं चलता क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान थायरॉइड हार्मोन की कुछ मात्रा शिशु में पहुंच जाती है। हार्मोन की कमी का पता चलते ही तत्काल थायरॉइड हार्मोन का रिप्लेसमेंट प्रारंभ कर दिया जाना चाहिए।
इलाज :
कॉन्जेनिटल हाईपोथॉयराइडिज्म को अधिकांश स्थितियों में रोका नहीं जा सकता है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान इसके खतरे को कम करने के लिए डॉक्टर के बताए अनुसार पर्याप्त आयोडीन लेना चाहिए। उपचार के विकल्प के रूप में उसे मुंह से लीवोथायरॉक्सिन (सिंथेटिक थायरॉइड हार्मोन) दी जाती है।
Published on:
17 Mar 2019 01:00 pm
