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Heart Blockage: कम उम्र में हार्ट ब्लॉकेज ये हैं कारण, इस तरह करे पहचान

Reasons for heart blockage: कभी बुजुर्गावस्था में होने वाली हार्ट ब्लॉकेज की समस्या अब कम उम्र में भी होने लगी है। दरअसल, खराब खानपान व तनाव का असर हमारे दिल पर भी पड़ता है। दिल की अच्छी सेहत के लिए इसका ध्यान रखना जरूरी है। खराब डाइट और लाइफस्टाइल किसी को भी हार्ट पेशेंट बना सकते हैं।
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जयपुर

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Jyoti Kumar

•

Updated: 16 Jul 2023, 2:47 PM IST

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Reasons for heart blockage: कभी बुजुर्गावस्था में होने वाली हार्ट ब्लॉकेज की समस्या अब कम उम्र में भी होने लगी है। दरअसल, खराब खानपान व तनाव का असर हमारे दिल पर भी पड़ता है। दिल की अच्छी सेहत के लिए इसका ध्यान रखना जरूरी है। खराब डाइट और लाइफस्टाइल किसी को भी हार्ट पेशेंट बना सकते हैं।

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संभावित कारण
दिल तक जाने वाली खून की नसों में ब्लॉकेज होने पर हार्ट अटैक होता है। फैट, कोलेस्ट्रॉल व अन्य हानिकारक पदार्थों के प्रभाव से धमनियों में ब्लॉकेज होता है। जब दिल में मौजूद कोरोनरी आर्टरीज की दीवारों में ज्यादा कॉलेस्ट्रोल जमा हो जाता है तो इससे ब्लड फ्लो में दिक्कत होने लगती है जिससे हार्ट ब्लॉकेज होता है।

17-18 की उम्र में हो जाएं सतर्क

फैमिली हिस्ट्री है तो 17-18 वर्ष की उम्र से ही सतर्क रहें। हृदय संबंधी जन्मजात विकृति हो तो जीवनशैली को लेकर सावधानी बरतें। एल्कोहल, धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज, हाइपर कोलेस्ट्रॉल, स्लीप एप्निया और बदलती जीवनशैली में सोशल मीडिया का उपयोग स्ट्रेस बढ़ा रहा है जिससे हार्ट पर असर पड़ता है।

कैसे पहचानें- छाती में जकडऩ, पसीने आना, सांस लेने में दिक्कत, अनियंत्रित धड़कन, चक्कर आना जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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बचाव के तरीके
जीवनशैली संयमित रखें।
एल्कोहल व धूम्रपान का सेवन न करें
डायबिटीज नियंत्रित रखें।
स्ट्रेस और डिप्रेशन से बचें।
शुरुआती लक्षणों का अहसास हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
इंस्ट्रक्टर की देखरेख में व्यायाम और मेडिटेशन करें।
एक्सरसाइज के बाद बैलेंस डाइट लें।
ऐसी चीजें न खाएं जो शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं।
फास्ट फूड और जंक फूड से दूर रहें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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