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चश्मा अगर लग गया तो उतरना हो जाएगा मुश्किल, जानें ये खास बातें

eye problems - छोटे बच्चों को लैपटॉप, मोबाइल फोन व कंप्यूटर पर खेलने न दें।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Oct 16, 2018

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eye problems - छोटे बच्चों को लैपटॉप, मोबाइल फोन व कंप्यूटर पर खेलने न दें।

आंखों के अहम हिस्से (कॉर्निया, लेंस, रेटिना व रक्त कोशिकाएं) देखने में मदद करते हैं। एक स्वस्थ आंख की ऑप्टिकल पावर सामान्यत: 60 डायप्टर (40 डायप्टर कॉर्निया और 20 डायप्टर क्रिस्टलाइन लेंस की पावर) होती है। वहीं रेटिना शार्प फोकस बनाता है जिससे फोटोकेमिकल चित्र एनर्जी में बदलकर ब्रेन को चीजें देखने का सिग्नल देते हैं। साथ ही आंखों की पुतली रोशनी के अनुसार आकार बदलती है। ऐसे में आंखें कमजोर होने से इसके आकार बदलने की क्षमता प्रभावित होती है व देखने में दिक्कत होती है। समय पर आंखों की जांच व डॉक्टरी सलाह लें।

डॉक्टरी सलाह
आंखों में चोट लगने से कॉर्निया प्रभावित होता है। ये बहुत कोमल होती हैं ऐसे में तीर-कमान, नुकीले खिलौने, क्रिकेट व गिल्ली-डंडा जैसे खेलों से बचें। अगर खेलने का शौक है तो सुरक्षा का खास ध्यान रखें जिससे चोट न लगे। चोट लगने पर सीधे अस्पताल जाएं। आंख में किसी भी तरह का घाव होने पर खुद कोई इलाज न करें तुरंत अस्पताल जाकर डॉक्टरी सलाह लें। आंख में कोई केमिकल इंजरी है तो साफ पानी से लगातार आधे घंटे तक आंखें धोएं। संक्रमण नहीं फैलेगा। इसके बाद डॉक्टर को दिखाएं।

टीवी, मोबाइल से निकली किरणें होती हैं खतरनाक
बच्चे हों या बड़े आंखों का नंबर बढऩे का बड़ा कारण टीवी, मोबाइल के साथ लैपटॉप और कंप्यूटर का अधिक प्रयोग करना है। इनकी स्क्रीन से निकलने वाली किरणें आंखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। लंबे समय तक ऐसा रहने से आंखों से दिखाई देने संबंधी परेशानी बढ़ती है और कई बार आंखें बहुत कमजोर होने व चश्मा लगाने की जरूरत पड़ने पर इसका पता चलता है। ऐसे में सभी को कुछ दूरी से इनके प्रयोग की सलाह दी जाती है।

लक्षण को पहचानें
मनोरंजन वाली चीजों में आनंद न लेना या दूर भागना। हमेशा थकान महसूस करना, काम करने की इच्छा न होना, निर्णय न ले पाना या असमंजस की स्थिति में रहना व खानपान की आदतों में अचानक बदलाव प्रारंभिक लक्षण हैं। बात-बात में आत्महत्या के लिए धमकी देना व नाराज होना। अचानक से किसी बात पर रोना या स्वभाव में चिड़चिड़ापन, गुस्सा या अकेले रहना, अनिद्रा व स्लीपिंग पैटर्न में बदलाव व्यक्ति के लिए नकारात्मक संकेत हैं।

चश्मा उतरना मुश्किल
एक बार यदि चश्मा लग जाए तो इसका उतरना थोड़ा मुश्किल है। वयस्क को चश्मा लगने से बचाने के लिए कॉन्टैक्ट लेंस व लेसिक तकनीक 20 वर्ष की उम्र के बाद ही संभव है। ऐसे में जिन बच्चों को चश्मा लग गया हो उन्हें नियमित लगाना चाहिए। इसी तरह बड़ों में 35-40की उम्र में आंखें तेजी से कमजोर होने लगती हैं।

इलाज का तरीका
आंखों को त्रिफला के काढ़े से साफ करने से रोशनी तेज होती है। इसके लिए एक ग्राम त्रिफला में चार गुना पानी मिलाकर उबालें। ठंडा होने पर छान लें। दिन में 3-4 बार इस पानी में रुई का फाहा भिगोकर आंखों को साफ करने से फायदा होगा। आंखों के लिए गाजर, चुकंदर, आंवला व पालक खाना फायदेमंद होता है। आंखों में गुलाबजल डालने या ठंडे पानी से इन्हें धोना भी लाभदायक है। साथ ही क्र्रियाकलाप प्रक्रिया करें जैसे आंखों के चारों तरफ उड़द के आटे से चारों तरफ घेरा बनाकर उसमें मेडिकेटेड दवा डालें। आंख की कोशिकाएं दवा को भीतर खींचकर धुंधलापन दूर करती हैं।

आंख संबंधी गतिविधियां करें
आंख से जुड़े वर्कआउट करें। सन स्विंगिंग (किसी रोशनी के स्त्रोत या सूरज की ओर देखकर आंख कर बंद कर दाएं-बाएं घुमाएं), पेंडुलम वर्कआउट (आंखों को पेंडुलम की तरह दाएं-बाएं घुमाना), अक्षर लिखे चार्ट को 20 फीट दूरी से 20 सेकंड तक पढ़ें। साथ ही सिर-गर्दन घुमाएं बिना ऊपर देखें। फिर 10 बार क्लॉकवाइज व 10 बार उल्टी दिशा में आंखें घुमाएं। आंखों को आराम देने के लिए इन्हें बंद कर खीरे का टुकड़ा या गुलाबजल से भीगी रुई रख सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान -

छोटे बच्चों को लैपटॉप, मोबाइल फोन व कंप्यूटर पर खेलने न दें।
बच्चा यदि कमजोर है या मन नहीं लग रहा तो आंखों की जांच करा लें। ये आंख संबंधी परेशानी के लक्षण भी हो सकते हैं।
घर के बेडरूम में टीवी लगवाने से बचें।
विटामिन-सी युक्त चीजें जैसे संतरा, आंवला, टमाटर आदि खाएं।
गाने सुनें, फिल्में देखें व पुस्तकें पढऩे के लिए लाइब्रेरी जाएं।
अनावश्यक दर्द निवारक दवाएं लेने से बचें।


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