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धूम्रपान, मदिरापान, व्यायाम न करने व अवसाद से होती है स्पाइनल स्ट्रोक की गंभीर समस्या

धूम्रपान, मदिरापान व व्यायाम जो लोग नहीं करते उन्हें भी स्पाइनल स्ट्रोक का खतरा रहता है। स्पाइन में ट्यूमर, चोट लगने, स्पाइनल कॉर्ड दबने, हृदय की सर्जरी होने से ये दिक्कत होती है। 25% लोगों को होता है स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या, 25% मरीजों की हॉस्पिटल से रिलीव होने के बाद नहीं होती रिकवरी ।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Nov 19, 2019

धूम्रपान, मदिरापान, व्यायाम न करने व अवसाद से होती है स्पाइनल स्ट्रोक की गंभीर समस्या

Spinal stroke: Symptoms, causes, recovery

स्पाइनल कॉर्ड की ओर रक्त का प्रवाह बाधित होता है तो उसे स्पाइनल स्ट्रोक कहते हैं। इसके ठीक प्रकार से काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में रक्त की आपूर्ति जरूरी है। जब रक्त प्रवाह बाधित होता है तो स्पाइनल कॉर्ड को ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्त्व नहीं मिल पाते हैं। इस कारण ऊतकों को नुकसान होता है। ऐसे में वे क्षतिग्रस्त भी हो सकते हैं। स्पाइनल कॉर्ड से गुजरने वाले संदेश (नर्व इम्पल्स) ब्लॉक हो सकते हैं।

ब्लीडिंग के कारण भी होती दिक्कत -
अधिकतर स्पाइनल स्ट्रोक रक्त प्रवाह में ब्लॉकेज (आमतौर पर ब्लड क्लॉट्स) के द्वारा होता है। इसे इसचैमिक स्पाइनल स्ट्रोक्स कहते हैं। कुछ स्पाइनल स्ट्रोक्स ब्लीडिंग के कारण होते हैं, जिसे हैमरेज स्पाइनल स्ट्रोक्स कहते हैं। यह हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोगों, डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा दिक्कत होती है। जो लोग धूम्रपान, मदिरापान करते हैं, नियमित व्यायाम नहीं करते हैं उन्हें भी खतरा अधिक होता है। स्पाइन में ट्यूमर, चोट लगने, स्पाइनल कॉर्ड दबने और पेट या हृदय की सर्जरी में यह दिक्कत होती है। स्पाइनल कॉर्ड सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) का भाग है। इसमें मस्तिष्क भी सम्मिलित है। स्पाइनल स्ट्रोक्स, ब्रेन स्ट्रोक से कम होते हैं।

एमईएस तकनीक कारगर-
पहचान व जल्द इलाज से स्पाइनल कॉर्ड को स्थाई क्षति रोक सकते हैं। यदि चोट के कारण स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बढ़ रहा है तो सर्जरी से दूर करते हैं। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (एमईएस) तकनीक ने सर्जरी में छोटे-छोटे कट लगाते हैं और आधे घंटे से कम समय में सर्जरी करते हैं। इसमें ओपेन सर्जरी की तुलना में परेशानियां कम होती हैं।

स्ट्रोक के घंटों बाद लक्षण दिखाई देते -
स्ट्रोक से स्पाइनल कॉर्ड को कितनी क्षति हुई है यह इसपर निर्भर करता है कि कॉर्ड का कौनसा भाग प्रभावित हुआ है। अधिकांश मामलों में लक्षण तुरंत दिखाई देते हैं लेकिन कई बार ये स्ट्रोक आने के घंटों बाद दिखाई देते हैं। इसके प्रमुख लक्षण हैं-
अचानक गर्दन या कमर में तेज दर्द।
पैरों की मांसपेशियां कमजोर हो जाना।
मांसपेशियों में ऐंठन होना।
सुन्नपन, हाथ-पैरों में झुनझुनी होना।
लकवा मारना, गर्म-ठंडा महसूस नहीं कर पाना प्रमुख लक्षण हैं।

शरीर की गतिविधियां प्रभावित -
स्पाइनल स्ट्रोक कुल स्ट्रोक्स में से सिर्फ दो प्रतिशत होते हैं। इस स्ट्रोक के होने पर नर्व इम्पल्स (संदेश) भेजने में परेशानी होती हैं। ये नर्व इम्पल्स शरीर की गतिविधियों जैसे हाथों और पैरों को हिलाना और शरीर के अन्य अंगों के ठीक तरीके से कार्य करने और नियंत्रित करने का काम करते हैं।

अवसाद प्रमुख वजह -
यदि स्पाइनल कॉर्ड के आगे के भाग में रक्त आपूर्ति कम हुई है तो पैर लकवाग्रस्त होते हैं। सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में कमजोरी, अवसाद, ऑस्टियोपोरोसिस, डिस्ककी खराबी और ट्यूमर भी प्रमुख कारण होते हैं।

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