
पैरालाइसिस के इलाज में अहम होते हैं शुरू के 4-5 घंटे
पेरालाइसिस या स्ट्रोक मौत का चौथा महत्त्वपूर्ण कारण है। इसके लक्षण अचानक आते हैं जो दिमाग के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग होते हैं। रक्तधमनी में आए थक्के को जल्द से जल्द हटाना जरूरी होता है क्योंकि हर एक सेकंड इससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान होता है। यदि रोगी जल्दी अस्पताल पहुंचता है तो उसे एक इंजेक्शन दिया जाता है।
यह विधि थ्रोम्बोलाइटिस या क्लॉट डिजॉल्व होती है। इससे बंद हुई धमनी को खोला जाता है जिससे मरीज तुरंत पहले जैसी अवस्था में आ जाता है।
महत्त्वपूर्ण घंटे:
इस प्रभावी इंजेक्शन को 4-5 घंटे में ही दिया जा सकता है। इसलिए लकवे को पहचानना जरूरी है। अगर आप इस तरह का मरीज देखें तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। आमतौर पर अस्पताल पहुंचने के बाद ही डॉक्टर, मरीज को देख पाते हैं जिसमें समय लगता है। इसलिए अस्पताल को पहले से ही फोन पर सूचित कर दें। इससे इलाज में आसानी होती है क्योंकि यदि सुविधा वाली एम्बुलेंस हो तो केबूला लगाना, नापना आदि काम रास्ते में किए जा सकते हैं।
Published on:
23 Mar 2019 12:01 pm
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