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खून में गर्मी या शीत बढऩे से होते हैं ये रोग

यूनानी में कई ऐसी दवाएं है जो खून में गर्मी या फिर शीत को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी हैं। इनका नियमित सेवन करने से रोगों से छुटकारा मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ मरीज लक्षणों के आधार पर दवा देते हैं।

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होती हैं कई समस्याएं
खून में गर्मी बढऩे के कारण अर्टिकेरिया, तेज दर्द करने वाले कील मुंहासे, हरपीज जॉस्टर आदि बीमारियां हो सकती हैं। खून में शीत बढऩे से कील मुंहासे जिनमें दर्द या ना हो या फिर कम दर्द हो, सोरायसिस व एक्जिमा होता है।
रखें ध्यान
खून में गर्मी बढ़ाने के लिए अंगूर, खरबूजा, तरबूज, अनार, छाछ, दही, केरी का पना आदि के सेवन से लाभ होता है। इससे त्वचा संबंधी रोग ठीक होंगे। यदि शीत की समस्या है तो गर्म मसाले, मौसमी फल खाने से शीत ठीक होगा।
फसाद (खराबी) -ए- दम (खून) यानी खून में गर्मी व सर्दी बढऩे से रोग होना। खून में सर्दी व गर्मी का संतुलन बनाकर इलाज करते हैं।
लक्षण: खून में गर्मी होने पर यूरिन में जलन व उसका रंग बदलना, कील-मुंहासों में तेज दर्द व चुभने वाला दर्द होता है। साथ ही दाने लाल व पीले होंगे। शीत से एसी मेंं बैठने में दिक्कत होती है। मुंहासों के मवाद का रंग सफेद होता है।
इलाज व परहेज
गर्मी बढऩे पर मिर्च-मसाले, मैदा, बैंगन, आलू, गोभी, चावल से परहेज करें। शीत बढऩे पर लौकी, टिंडा, तोरई, अंगूर, तरबूज न खाएं।
इलाज: एक गिलास पानी में सात ग्राम नीलोफर पाउडर, उन्नाब, गुले मुंडी व शाहतरा को रातभर भिगो दें। सुबह उबालें व ठंडा कर शर्बत बाजूरी मिलाकर पीने से गर्मी कम होगी। जंजबील, जवारिश जालिनूस कलौंजी व इतरीफल उस्तेखुद्दूस का जोशांदा पीने से शीत कम होगा।
डॉ. मो. आसिफ खान, यूनानी चिकित्सक

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