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बच्चों के शरीर व दिमाग को मजबूत बनाते हैं ये योग

योग विशेषज्ञों के अनुसार जो बच्चे नियमित रूप से योग करते हैं, वे स्वस्थ रहने के साथ-साथ सक्रिय बने रहते हैं।
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child yoga

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कई समस्याएं होती दूर
पढऩे वाले बच्चे स्कूल, कॉलेज, कोचिंग या स्टडी टेबल पर अपना ज्यादातर समय बिताते हैं। ऐसे में उनकी अन्य गतिविधियां कम हो जाती हैं जिससे उनमें मोटापा, आलस, तनाव और चिड़चिड़ापन जैसी कई समस्याएं बढ़ने लगती हैं। योग विशेषज्ञों के अनुसार जो बच्चे नियमित रूप से योग करते हैं, वे स्वस्थ रहने के साथ-साथ सक्रिय बने रहते हैं। इससे उनमें ऊर्जा व एकाग्रता का स्तर बढ़ता है नतीजतन वे परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
थोड़ी देर टहल आएं
पढ़ाई के दौरान अक्सर बच्चों को आलस व थकान महसूस होती है। उन्हें मेडिटेशन करने की सलाह दी जाए तो उन्हें नींद आने लगती है। इसके लिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को पढ़ाई के दौरान 25-30 मिनट बाद थोड़ी देर टहलने और लंबी सांस लेने व छोडऩे की प्रक्रिया करने की सलाह दें।
आंखों को आराम दें
त्राटक (किसी बिंदु पर ध्यान केंद्रित करना), आंखों को दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे, क्लॉकवाइज-एंटीक्लॉकवाइज गोलाकर घुमाना, आदि गतिविधियां एक बार में 5-10 बार दोहरा सकते हैं। आंखों की थकान, जलन व पानी आने की समस्या में थोड़ी-थोड़ी देर में आंखों को ठंडे पानी से धोएं।
गर्दन को गोलाकार घुमाएं : बैठे रहने से गर्दन में दर्द व अकड़न की समस्या होती है, इसके लिए कंधे व गर्दन को दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे, गोलाकर घुमाने जैसे व्यायाम कर सकते हैं। इससे गर्दन व कंधों से जुड़ी नसों को राहत मिलेगी।
मोटापा नहीं बढ़ेगा : सूर्य नमस्कार, कपालभाति व वज्रासन आदि से भोजन आसानी से पचता है व कमर के आसपास चर्बी नहीं बढ़ती।

पाचनक्रिया सही रहेगी: लगातार बैठे रहने के दौरान बीच-बीच में 5-5 मिनट पवनमुक्तासन, भुजंगासन, ताड़ासन जैसे योग करने से पाचनक्रिया सही रहेगी व शरीर में लचीलापन आएगा।
फेफड़े रहेंगे स्वस्थ : बंद कमरों में रहने से बच्चों को कई बार सांस-संबंधी तकलीफ होती है। ऐसे में उन्हें काम के दौरान श्वास-प्रश्वास क्रिया (लंबी गहरी सांस) व ॐ का उच्चारण करवाएं।
स्वभाव में बदलाव: अक्सर 10-12 साल के बाद से बच्चों के हार्मोंस में बदलाव आने से उनमें चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा जैसी आदतें आने लगती हैं। ऐसे में खाटू-प्रणाम, तितलीआसन, ताड़ासन व वृक्षासान आदि कारगर हैं।
विहार के साथ आहार में भी सुधार करें। उनकी डाइट में हरी सब्जियां, दूध, मौसमी फल व अंकुरित अनाज जैसी चीजें शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत डालें व एक बार में प्लेटभर भोजन देने के बजाय 5-6 बार में दें। इससे शरीर को ऊर्जा व पौष्टिकता मिलेगी।
डॉ. शिवरतन मीणा, योग विशेषज्ञ

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