कोरोना वायरस संक्रमण में सूंघने की क्षमता कमजोर होना प्रारंभिक लक्षण !

फिलिंडर्स वियवविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल खांसने और सांस लेने में तकलीफ ही नहीं सूंघने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

नोवेल कोरोना वायरस के शुरुआती प्रमुख लक्षणों में अब शोधकर्ता सूंघने की क्षमता के कम होने को भी शामिल कर रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि नए मामलों और लक्षणों के ठीक से परिलक्षित न होने वाले मामलों में यह कितना उभर कर सामने आ पाता है। दुनिया भर में चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपने शोध के निष्कर्ष में माना है कि सूंघने की क्षमता में कमी को कोविड-19 का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। हालांकि अभी इस प्रारंभिक अवलोकन को आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वाराकोरोना वायरस के लक्षण के रूप में मान्यता नहीं दी है।

अमरीकन एकेडमी ऑफ ओटोलैरिंगोलोजी, राष्ट्र संघ प्रमुख और सिर एवं गर्दन के विख्यात सर्जनों ने हाल ही में बताया कि सीओवीआईडी-19 के लक्षणों की आधिकारिक सूची में एनोस्मिया (सूंघने की क्षमता का आशिंक या पूरी तरह नष्ट हो जाना), हाइपोसिमिया और डिस्गेशिया को शामिल किया गया था। ये तीन स्थितियां गंध और स्वाद की इंद्रियों में कमीए या पूर्ण नुकसान को संदर्भित करती हैं। हालांकि कोविड-19 के मामलों में कई पूर्व-महामारी विज्ञान के अध्ययनों ने एनोस्मिया पर डेटा एकत्र नहीं किया है, इसलिए इस स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि यह लक्षण कितना सामान्य हो सकता है।

100 लोगों पर किया शोध -
वायरस के संक्रमण के अन्य लक्षणों की पहचान करने के लिए हुए इस लघु शोध में जर्मनी के एक अस्पताल में 100 कोरोना संक्रमित रोगियों पर परीक्षण किया गया था। इनमें से दो तिहाई ने सूंघने एवं स्वाद पहचानने की अपनी क्षमता में कमी की शिकायत की। वहीं एक अन्य शोध अध्ययन में दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने कहा कि 30 फीसदी कोरोना पॉजिटिव रोगियों में सूंघने की क्षमता में कमी पाई गई। ब्रिटिश राइनोलॉजिकल सोसायटी के निदेशक क्लेयर होपकिंस ईएनटी, यूके के निदेशक निर्मल कुमार का कहना है कि ये लक्षण संक्रमित लेकिन कम गंभीर रोगियों (माइल्ड केस) और लक्षण न नजर आने वाले मरीजों में भी देखे गए हैं।

विकास गुप्ता Desk
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