
मुकेश हिंगड़
Agricultural Colleges in Dungarpur : कृषि कॉलेज की जमीन को लेकर विवाद बढ़ गया है। राजनीतिक रूप से बयानबाजी का माहौल है। इस बीच पत्रिका ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के मापदंडों को टटोला तो सबसे खास बात यह है कि जहां भी कॉलेज के लिए जमीन चिन्हित करें वहां खेती युक्त जमीन हो। अगर जमीन दो भागों में भी होगी तो उसमें पांच मिनट में दूसरी जगह कॉलेज के वाहन से पहुंचा जा सके। इसके अलावा आसपास सुविधाएं हो और इजी एप्रोच भी जरूरी है। दूसरी चिंता की बात यह है कि एक साल में कॉलेज का भवन खड़ा नहीं हुआ, तो थर्ड इयर भी शुरू हो जाएगा तब कॉलेज का संचालन कैसे होगा?
भले ही गुमानपुरा व थाना में जमीन देने की सहमति प्रदान कर दी गई है। पर, इससे पहले महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि रिकॉर्ड पर तो गुमानपुरा वाली जमीन को लेकर लिखित में मना कर दिया था ये जमीन उनके मापदंडों के अनुरुप नहीं है। इस बीच अब फिर विश्वविद्यालय की कमेटी आगामी दिनों में यहां दौरें पर आने वाली है, जो जमीन को लेकर पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसार कृषि कॉलेज के लिए 30 हैक्टेयर जमीन होनी चाहिए। इसमें एक साथ जमीन नहीं हो तो दो भागों में भी जमीन ली जा सकती है। दो जगह होने में दूरी बहुत कम होनी चाहिए।
कॉलेज के लिए जमीन कैसी हो समझे
1. जमीन : जमीन पथरीली नहीं होनी चाहिए। जमीन सिंचाई योग्य हो क्योंकि अलग-अलग फॉर्मिंग का कार्य भी होगा। जमीन दो भागों में हो सकती है लेकिन कॉलेज से फॉर्मिंग वाले स्थान पर कॉलेज के स्वयं की बस से पांच मिनट में पहुंचा जा सके यह जरूरी है।
2. सडक़ व पानी : कॉलेज के लिए जमीन सडक़ से सटी हुई हो। इजी एप्रोच होने से हर तरह से सुविधाजनक रहेगा।
3. सुविधाएं : मेडिकल, परिहवन की सुविधाएं होनी चाहिए।
4. भविष्य : भविष्य का मास्टर प्लान भी अभी तैयार करना होगा। आगे जाकर कॉलेज का विस्तार होगा।
5. पानी : जो जमीन मिले उस क्षेत्र में पर्याप्त पानी भी होना जरूरी है क्योंकि कृषि के लिए पानी अहम है।
(एक्सपर्ट के अनुसार)
भवन जल्दी बनेगा तो उसके बहुत फायदे
भवन जल्दी बनेगा तो उसके बहुत फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा तो यह होगा कि आईसीएआर की मान्यता भी मिल जाएगी और उसके बाद फंडिंग भी शुरू हो जाएगी। जल्दी यह काम नहीं होता है तो आगामी सत्र में थर्ड इयर भी शुरू हो जाएगा तब कैसे संचालन होगा। अभी सैकेंड इयर की क्लासों को लेकर भी बादल महल वाली जगह कम पड़ रही है।
आईसीएआर के मापदंड की पालना जरूरी
कृषि कॉलेज खोलने के लिए बड़ा सेटअप चाहिए। बिल्डिंग से लेकर फार्मिंग की जगह होनी चाहिए। अगर मापदंड के विपरीत कॉलेज बना, तो आईसीएआर की मान्यता को लेकर भी संकट होगा।
पत्रिका व्यू....
डूंगरपुर के भविष्य की सोचे...
डूंगरपुर को कृषि महाविद्यालय मिला है। आने वाले कल में महाविद्यालय विश्वविद्यालय में भी प्रमोट होगा, ऐसे में हमे भविष्य को सोचकर ही निर्णय करना होगा। इस समय राजनीतिक लड़ाई को एक तरफ रखकर सबको एक जाजम पर बैठना चाहिए। आईसीएआर के मापदंड और कृषि विवि क्या चाहता है सबसे पहले उस पर विचार हो और उसको समझा जाए। उसी के अनुरुप निर्णय किया जाए। जल्दबाजी में आगे कोई नुकसान नहीं हो इस बिन्दु को भी जेहन में रखना होगा। जमीन के लिए अपने राजनीतिक व व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं होने चाहिए। आगामी दिनों में कृषि विवि की जो टीम आ रही है उसके साथ भी बैठकर चर्चा करनी चाहिए कि वे क्या चाहते है? कुल मिलाकर सबको साथ बैठकर कृषि महाविद्यालय के भविष्य को ध्यान में रखकर जल्द फैसला करना चाहिए। इसमें अब देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित नहीं हो और जल्दी से कॉलेज के लिए जमीन मिल जाए और भवन निर्माण का कार्य शुरू हो जाए।
Published on:
12 Nov 2022 11:58 am

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