
अब डूंगरपुर की हवाएं बताएगी कि कितना है उनमें दम
डूंगरपुर. डूंगरपुर की हवाओं में कितना है दम, डूंगरपुर में कितना तेज चमकता है सूरज, कितना रहा आज डूंगरपुर अधिकतम-न्यूनतम तापमान और आने वाले दिनों में क्या रहेगी मौसम की चाल। ऐसे एक नहीं डूंगरपुर जिले के लिए वर्षों से अबुझ सवालों के जवाब अब जिलेवासियों के काश्तकारों एवं आमजन को उपलब्ध होंगे। न केवल पूरे जिले के समेकित आंकड़े अपितु, ब्लॉक स्तर से जुड़ी मौसम संबंधित पल-पल की अपडेट और वह भी बिल्कूल सटीक जानकारी मिलेगी। दरअसल भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश के 130 जिलों में से डूंगरपुर को भी शामिल करते हुए मौसम वैधशाला स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत जिले के दस ब्लॉकों की मौसम से जुड़ी एक-एक कृषि संबंधित जानकारी सांझा की जाएगी। इसके लिए कृषि विज्ञान केन्द्र फलौज में आवश्यक संयंत्र स्थापित होंगे।
यह संयंत्र होंगे स्थापित
कृषि विज्ञान केन्द्र फलौज में 55 गुणा 36 मीटर के परिसर में बनने वाली इस वैधशाला में वर्षा को मापने के लिए वर्षामापी यन्त्र, वायु की गति मापने के लिए एनीमोमीटर, हवा की दिशा जांचने के लिए विंडवेन, वाष्पीकरण की दर को मापने के लिए पेन-इवेपोरीमीटर, प्रकाशीय घंटे के लिए सनसाइन रिकॉर्डर, विभिन्न गहराई पर मृदा का तापमान मापने के लिए थर्मामीटर, ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन आदि स्थापित किए जाएंगे।
यह है उद्देश्य
योजना का मुख्य ध्येय ब्लॉक स्तर पर मौसम का पूर्वानुमान तथा किसानों को मौसम आधारित कृषि संबंधी सलाह दी जाए। साथ ही उपग्रह तथा राडार (रेडियो डिटेक्शन ऐण्ड रेंजिंग) से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग भी मौसम पूर्वानुमान में किया जाए।
अब मिलेंगे और अधिक तथ्यात्मक आंकड़े
कृषि-मौसम विज्ञान केन्द्र के मौसम विषय विशेषज्ञ डा. ज्ञानप्रकाश नारोलिया ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग, ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, कृषि विज्ञान केन्द्र डूंगरपुर को हर मंगलवार व शुक्रवार को आगामी पांच दिनों के मौसम की जानकारी जैसे अधिकतम व न्यूनतम तापमान, वायु की गति तथा दिशा, अधिकतम व न्यूनतम आद्र्रता, वर्षा, बादलों की जानकारी ई-मेल के माध्यम प्राप्त हो रही हैं। गत दस दिनों तथा अगले पांच दिनों के मौसम को ध्यान में रखते हुए स्थानीय केन्द्र के सलाहकार मण्डल में सम्मिलित विभिन्न कृषि विषय विशेषज्ञ मौसम आधारित बुलेटिन बना रहे हैं। संयंत्र स्थापना के बाद मौसम संबंधित समस्त आंकड़े यहां से मौसम विज्ञान विभाग को प्रेषित किए जाएंगे। उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। इसके माध्यम से जिले के मौजूदा हालातों के मद्देनजर और अधिक तथ्यात्मक और सटीक आंकड़े जारी किए जाएंगे।
किसानों को सीधे मिलेगी जानकारी
कृषि मौसम इकाई की ओर से कृषि के मौसम आधारित प्रबंधन की सूचना किसानों को विभिन्न माध्यमों जैसे ई-मेल, संस्थान के वेबपेज, कृषि विज्ञान केन्द्र, ई-चौपाल, गैर-सरकारी संगठन, इफ्को किसान संचार लिमिटेड, कृषि तकनीकी सूचना केन्द्र, ऑल इण्डिया रेडियो, राज्य कृषि विभाग, वाट्सअप ग्रुप आदि के माध्यम से अधिक से अधिक प्रचारित की जाएगी। ताकि, किसान आगामी दिनों को ध्यान में रखकर कृषि प्रबंधन कर पाए। इस कार्य के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र फलौज में विषय विशेषज्ञ (कृषि-मौसम विज्ञान) एवं एग्रोमेट ऑबजर्वर की नियुक्ति की जा चुकी है। जिन्होंने हर मंगलवार व शुक्रवार को कृषि मौसम परामर्श जारी करना भी शुरू कर दिया है।
अधिकारी ने कहा...
मौसम तथा कृषि में गहरा संबंध है। मौसम कृषि को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक है। कृषि कार्य मौसम के प्रति काफी संवदेनशील होते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम विविधता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके कारण कृषि को विभिन्न मौसमीय घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और किसानों की अर्थव्यवस्था भी बिगड़ जाती है। पर, वैधशाला के स्थापित होने के बाद किसानों को समय पर मौसम संबंधित सटीक जानकारी मिल पाएगी। इससे कृषि को मजबूत संबंलन मिलेगा।
- डा. सीएम बलाई, मुख्य वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र, फलौज
Published on:
06 Mar 2020 11:27 am

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