डूंगरपुर
सरकार की ओर से बच्चों को सुविधा के लिहाज से संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति दयनीय है। स्थितियां यह है कि इसके संचालन से लेकर सुविधाओं के मामले में अनदेखी है।जिससे जर्जर एवं किराये के भवनों में इनका मजबूरी में संचालन करना पड़ रहा है। इसके अलावा केंद्रों पर शौचालय, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो केंद्रों की ऐसे ही हाल सामने आए। हालात इतने गंभीर है कि कई केंद्रों में तो बरसात में पानी भर जाता है, जिसके चलते बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है।
यह तो महज बानगी
केस एक- सागवाड़ा नगर के यादव बस्ती में आंगनवाड़ी एक कमरे व छोटे हॉल में संचालित है। टीन शेड की छत है। बरसात में पानी ज्यादा गिरने पर बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। यहां बिजली की सुविधा भी नहीं हैं। रोशनी के लिए मोबाइल की लाइट जलानी पड़ती है। यहां पर १० बच्चों ने आंगनवाड़ी में प्रवेश ले रखा है । दो बच्चे ही मौके पर मौजूद थे।
केस दो– सागवाड़ा की गामठवाड़ा बस्ती में आंगनवाड़ी एक कमरे में संचालित हो रही है। टीन शेड तले बच्चों को बिठाना मजबूरी है। बरसात में पानी कक्ष में भर जाता है। आशा सहयोगिनी लीला रावल ने बताया कि आंगनवाड़ी में १० बच्चे पढ़ते हैं , ज्यादा बरसात पर बच्चों को छुट्टी दे दी जाती है।
केस तीन- चीखली पंचायत समिति क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन सरकारी व जर्जर भवनों में हो रहा है। कुछ किराये के भवन में चल रहे है। परियोजना में कुल 174 आंगनवाडी केन्द्र संचालित है। जिसमें 129 मुख्य आगनवाडी केन्द्र, 45 मिनी आगनवाडी केन्द्र चल रहे है। इसमें से विभागीय भवन में 92 केन्द्र संचालित है।
डूंगरपुर फैक्ट फाइल –
– 9 परियोजनाएं
– 2117 आंगनवाड़ी केंद्र
– 1125 आंगनवाड़ी केंद्र विभागीय भवन में संचालित
– 204 आंगनवाड़ी किराये के भवन में संचालित
– कई केंद्र सरकारी भवनों में भी चल रहे।
– 2109 केंद्रों में बिजली सुविधा का अभाव
– नगर में ५०० व ग्रामीण क्षेत्र में 200 रुपए किराया राशि।