
Handloom skills, becoming famous city
परम्परागत औजारों और कारीगरी से भी किसी क्षेत्र की ख्याति बढ़ती है इसे साबित कर दिखाया है डूंगरपुर के हथकरघा-हुनर ने। आजादी के पूर्व से चली आ रही यह कला राजनीतिक एवं प्रशासनिक सम्बलन के अभाव में फिलहाल हाशिए पर आ गई है, पर इस कला से जुड़े कलाकारों ने न केवल क्षेत्र, अपितु प्रदेश में जिले को एक अलग पहचान दिलाई है। राजस्थान सेवा संघ के माध्यम से चल रही 'हथकरघा-कला' पर मिलन शर्मा की रिपोर्ट...।
तीन दशक तक साथ
खादी सहित घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के कार्य में आजादी के पूर्व से जुटी राजस्थान सेवा संघ वर्षों से सूत एवं रुई से बुने खादी के वस्त्र एवं चटाई निर्माण में जुटा है। बुनकर जाति के लोग यहां दिन में कुछ घंटे आते हैं और दरी, चटाई आदि की बुनाई करते हैं। इन चटाइयों, फर्श दरी, खादी के वस्त्रों की डिमाण्ड पूरे जिले सहित प्रदेशभर में है। जानकार बताते है कि खादी की बनी मोटी फर्श दरी एक बार घर लाकर बिछा दी, तो यह दो से तीन दशक से भी अधिक समय तक साथ देती है। अधिकांशत सरकारी दफ्तरों में यहीं दरियां बिछाई जाती हैं।
कालीन सी चमक
कालीन जैसी दिखने वाली इन फर्श-दरियों को बनाने में राजस्थान सेवा
संघ के कारीगरों का हुनर काबिले तारीफ है। कारीगर नारायणलाल खराड़ी बताते हैं कि यहां की बनी फर्श दरी की डिमाण्ड बहुतायत होती है। इसके निर्माण के लिए
कोई अत्याधुनिक मशीनें भी नहीं है। हाथ से ही हम थोड़े बहुत लकड़ी और लोहे के औजार बनाते हैं और उससे ही बड़ी-बड़ी फर्श दरियां आदि बनाते हैं।
'सरकार से मिले विशेष प्रोत्साहन'
राजस्थान सेवा संघ के सहायक मंत्री राजेन्द्रप्रसाद त्रिवेदी का कहना है कि खादी एवं इससे जुड़े उत्पादों को अधिक सम्बलन देेने की जरूरत है। यह उद्यम हमारी लोक संस्कृति से भी जुड़ा है। हथकरघा उद्यम जीवित रहे, इसके लिए सरकार स्तर पर विशेष प्रयास किए जाने होंगे। अत्याधुनिक मशीनों के दौर में भी यह कला को अपनाए रखने वाले इन कारीगरों और उपक्रमों को विशेष प्रोत्साहन मिलना चाहिए। फिलहाल सालाना 45 लाख रुपए से अधिक का व्यवसाय हो रहा है।
'श्रमिकों को हुनर से मिल रही आय'
कताई-बुनाई प्रभारी रामदयाल बुनकर का कहना है कि गांधी आश्रम क्षेत्र में संचालित इस लघुउद्योग से कई निर्धन वर्ग के श्रमिक रोजगार भी पा रहे हैं। उन्हें सीजन के दिनों में प्रतिदिन हजार रुपए तक मिल जाता है। इस हुनर से जुड़े लोगों को राजस्थान सेवा संघ में बागवानी, शिक्षण आदि से जोड़ कर भी आर्थिक संबलन दिया जा रहा है।
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