17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Beneshwar festiwal : मावजी महाराज ने तीन सौ साल पहले कर दी थी उपग्रह और ऐरोप्लेन की परिकल्पना

कपड़े पर उकेरे थे रेखाचित्र, अक्षरश: सही साबित हो रही मावजी की आगमवाणियां, बेणेश्वर मेला विशेष

3 min read
Google source verification
Beneshwar festiwal : मावजी महाराज ने तीन सौ साल पहले कर दी थी उपग्रह और ऐरोप्लेन की परिकल्पना

Beneshwar festiwal : मावजी महाराज ने तीन सौ साल पहले कर दी थी उपग्रह और ऐरोप्लेन की परिकल्पना

डूंगरपुर. विज्ञान की प्रगति ने आज दुनिया को अंचभित कर रखा है। विज्ञान के दम पर मनुष्य चांद और मंगल ग्रह तक पहुंच चुका है, लेकिन भारतीय संत महात्माओं की दिव्य शक्तियों का कोई पारावार नहीं हैं। आज जिस ऐरोप्लेन और उपग्रहों की मदद से मनुष्य आसमान और अंतरिक्ष की सेर कर रहा है उनकी परिकल्पना 300 साल पहले संत मावजी महाराज ने कर दी थी। बेणेश्वर धाम को तपोस्थली बनाने वाले संत मावजी ने कपड़े पर उपग्रह और वायुयान के चित्र उत्केरित कर दिए थे जो वर्तमान में निर्मित उपकरणों से हूबहू मिलते हैं।
मावजी महाराज ने लगभग ३०० वर्ष पूर्व विभिन्न गीत व दोहे के माध्यम से भविष्यवाणियां की थी, उन्हें आगमवाणी कहा जाता है। मावजी महाराज के अनुयायी विशेष रूप से साद समाज के लोग आज भी उनकी आगमवाणी को भजनों के रूप में गाते हैं। शेषपुर के हरिमंदिर में सुरक्षित रखे गए वस्त्र-पट-चित्र (कपड़े पर रंगों से बने चित्र) पर बने हुए उपग्रह एवं हवाई जहाज के चित्र की आकृतियां तथा इस चित्र के नीचे लिखी इबारत 'विज्ञान शास्त्र वधी ने आकाश लागेगा उपग्रह वास करेंÓ विचार करने को मजबूर करती है। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र उपाध्याय का कहना है कि इतिहासकार महेशचन्द्र पुरोहित ने उन चित्रों को तथा चित्र के नीचे लिखे संदेश को हूबहू उतारा है। रविन्द्र डी. पण्ड्या ने भी अपनी पुस्तक 'श्री मावजी जीवन दर्पण में झांकती श्री कृष्ण लीलाÓ में भी शेषपुर गांव के हरि मंदिर के वस्त्र-पट-चित्रों के फोटो का प्रकाशन किया है। रविन्द्र डी.पण्ड्या की पुस्तक के चित्र तथा महेशचन्द्र पुरोहित द्वारा उतारे गए चित्र को मिलान करने से इसकी पुष्टि होती है।

संवत् 1784 में जन्में थे मावजी
वागड क्षेत्र की पवित्र एवं पुण्य धरा साबला धर्म नगरी में संवत 1784 माघ सुदी एकादशी वार सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण के अंशवतारी के रूप में मावजी महाराज का जन्म हुआ था। दालम ऋषि व केसर बां के कोख से अवतरण मावजी बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक थे। उन्हें आम बालकों की तरह खेलकूद और गाय-बकरियां चराने में रूचि नहीं थी। वे सोम-माही के संगम स्थल बेणके (बेणेश्वर) में जाकर वहां शांत और निर्मल वातावरण में बैठ कर चिन्तन और साधना करते रहते थे। प्रतिभा के धनी संत मावजी ने अपनी तपोभूमि बेणेश्वरधाम पर रास लीलाएं की। वे श्रीकृष्ण के अनन्य भक्ति, भविष्य वक्ता, ज्योतिषाचार्य व साहित्यकार व खगोलविद थे। 31 वर्ष के अल्पकाल जीवनकाल में उन्होंने पांच चौपडे लिखे थे जो आज भी मौजूद हैं। इन चौपडों में भविष्यवाणियों के साथ साथ विज्ञान, ज्योतिष, साहित्य, संगीत के साथ अर्थव्यवस्थाओं के बारे में सटीक जानकारियां हैं।


राष्ट्रीय धरोहर से कम नहीं हैं चौपड़े
मावजी रचित सामसागर, पे्रम सागर, रतन सागर, अनन्त सागर व मेघ सागर साबला, पूंजपुर, शेषपुर झल्लारा व बांसवाड़ा में अलग अलग स्थानों पर सुरक्षित हैं। भक्तों के मुताबिक पांचवां अनन्त सागर चौपड़ा बिटिश काल के समय अंग्रेज अपने साथ ले गए। बताया जा रहा कि इस चौपड़े में विज्ञान की अद्भुत भविष्यवाणियां हैं।

मावजी महाराज की बहुचर्चित भविष्यवाणियां
डोरिये दिवा बरेंगा- डोरी से दीपक जलेंगे
(बिजली के तारों से विद्युत बल्ब जलना)
वायरे वात थायेगा: हवा से बातें होंगी
(मोबाइल से चलते फिरते बात हो रही है)
परिये पाणी वेसाये: परी (तरल पदार्थ का छोटा मापक) से पानी बिकेगा
(वर्तमान में छोटी-छोटी बोतलों में पानी बिक रहा है)
गऊं चोखा गणमा मले - गेहूं चावल गिनकर मिलेंगे
(खाद्यान्न की कीमतें बढ़ चुकी हैं)
तरावे तम्बु तणासे - तालाब में तम्बू लगेंगे
(अकाल की समस्या साल-दर-साल बढ़ रही है।)
बरद ने सर से भार उतरसे - बैल पर से भार कम होगा
(अब खेती में ट्रैक्टर सहित अन्य उपकरणों का उपयोग बढ़ा)
खारा समन्दर मीठडा होसे - खारा समुद्र मीठा होगा
(समुद्र के पानी को फिल्टर कर उपयोग करना शुरू हो चुका है।)
वऊ-बेटी काम भारे, ने सासु पिसणा पीसेगा - बहु-बेटियां काम बताएंगी और सास चक्की पिसेगी
(बुजुर्ग सास-ससुर पर अत्याचार की घटनाएं आए दिन सामने आती हैं)
ऊंच नू नीच थासे नीच नूं ऊंच थासे - जो ऊंचे हैं वो नीचे होंगे और निम्न हैं वो उच्च होंगे।
(वर्ण व्यवस्था की स्थितियां पहले जैसी नहीं रही। अब सभी को प्रगति के समान अवसर हैं)
हिन्दू-मुसलमान एक होसे, एक थाली में जमण जीमासे - हिन्दू मुस्लिम एक होंगे, एक थाली में खाना खाएंगे।
(सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ा है)
पर्वत गरी ने पाणी थासे - पर्वत पिघल कर पानी होगा
(ग्लोबल वार्मिंग के चलते हिम ग्लेशियर पिघल रहे हैं।)
पणी रे मई थी लाय उपजसे- (पानी में से आग निकलेगी)
(दुनिया में कई जगह समंदर के बीच ज्वालामुखी हैं)
सूना नगरे बाजार लक्ष्मी लूट से लुकतणी - बीच बाजार में लक्ष्मी की लूट होगी।
(दिनदहाड़े लूटपाट की घटनाएं दिनों दिन बढ़ी हैं।)
घेर-घेर घोडी बंदाशे - घर-घर घोड़े बंधेंगे
(पूर्व में घोड़े आवागमन का साधन थे, आज हर घर में वाहन हैं।)


बड़ी खबरें

View All

डूंगरपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग