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Beneshwar Festival : पुराणों में भी मिलता है बेणेश्वर धाम का उल्लेख

बेणेश्वर धाम भले ही वर्तमान समय में अपनी महिमा के अनुरुप ख्याति और महत्व नहीं पा सका हो, लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व पुराणों तक में उल्लेखित है।

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Beneshwar Festival : पुराणों में भी मिलता है बेणेश्वर धाम का उल्लेख

Beneshwar Festival : पुराणों में भी मिलता है बेणेश्वर धाम का उल्लेख

डूंगरपुर. बेणेश्वर का संगम स्थल साधारण स्थल नहीं है। पुराणों में महिसागर संगम बेणेश्वर तीर्थ को सभी तीर्थों का सार बताया है। स्कनंद पुराण में स्वामी कार्तिकेय ने कहा है यदि किसी एक स्थान पर सब तीर्थों का संयोग चाहते हो, तो महिसागर संगम तीर्थ में जाएं। प्रभास की दस बार, पुष्कर की सात बार, प्रयाग की आठ बार यात्रा करने से जो फल प्राप्त मिलता है। वहीं, महिसागर तीर्थ की एक बार यात्रा करने से प्राप्त होता है। स्कन्द पुराण में ब्रह्माजी की सभा में उनके ज्येष्ठ पुत्र धर्मराज ने महिसागर को उनके द्वारा दिए गए विख्यात नहीं होने का श्राप का निवारण करते हुए उल्लेखित किया है। काशी, कुरूक्षेत्र, गंगा, नंदा, सरस्वती, तापी, पयोष्णी, निर्विन्ध्या, चन्द्रभागा, इरावती, कावेरी, सरयू, गण्डकी, नैमिषाण्य, गया, गोदावरी, अरूणा, वरूणा सहित पृथ्वी की 20 हजार 600 नदियों के सार तत्व से माही नदी का जल प्रकट हुआ है। माही नदी को देवी का स्वरूप बताते हुए समस्त सरिताओं की महारानी के रूप में प्रकट होना बताया है। वहीं, पुराणों में ब्रह्माजी एवं नारदजी का बेणेश्वर तीर्थ प्रिय स्थल होना बताया है। शनिदेव ने भी इस तीर्थ को विशेष वरदान प्रदान किया है। भीम के पौते एवं घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक को भी भगवान श्रीकृष्ण ने आराधना के लिए इस गुप्त क्षेत्र को उपयुक्त बताया था। राजा बलि, वाल्मीकि एवं संत मावजी की भी यह तप स्थली है।

हरिमंदिर साबला और राधाकृष्ण मंदिर बेणेश्वर से जुड़ी हैं अगाध आस्थाएं
साबला स्थित ऐतिहासिक हरिमंदिर और बेणेश्वर धाम पर बने राधाकृष्ण मंदिर से सर्व समाज की अगाध आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। मावजी महाराज की भी मूल गादी हरिमंदिर साबला में ही है। आज भी माघ पूर्णिमा से भगवान और महंत की पालकी बेणेश्वर धाम पर पहुंचती हैं। धाम पर पूर्व में राधाकृष्ण मंदिर छोटा था। वर्तमान में मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है। मंदिर को भव्य रूप दिया जा रहा है। इसमें दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं का सहयोग मिल रहा है।

अस्थि विसर्जन की है महिमा
त्रिवेणी संगम स्थल बेणेश्वर धाम की नदियों में बड़ी संख्या लोग तर्पण एवं दिवंगत परिजनों की अस्थियां विसर्जित कर मोक्ष की कामना करते हैं। यहां महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, लालबहादुर शास्त्री, राजसिंह डूंगरपुर, अटलबिहारी वाजपेयी जयप्रकाश नारायण, कांग्रेस नेता संजय गांधी, मोहनलाल सुखाडिय़ा, हरिदेव जोशी, वागड़ गांधी भोगीलाल पण्ड्या सहित अज्ञात शत्रु गौरीशंकर उपाध्याय, स्वतंत्रता सैनानी किशनलाल गर्ग आदि महान नेताओं की अस्थियां विसर्जित की गई हैं।


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