
डूंगरपुर.
सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा बच्चों को तंदुरस्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने अपने अंतिम अभिभाषण में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील के तहत दूध पिलाने की घोषणा की थी। लेकिन, हालात यह रहे कि चुनावी वर्ष होने के बावजूद सरकारी मशीनरी की उदासीनता के चलते यह दूध कागजों से बाहर ही नहीं निकल पाया।
यह थी योजना
मुख्यमंत्री ने १२ फरवरी २०१८ को मौजूदा सरकार के अंतिम बजट में मिड डे मील के तहत सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को सप्ताह में तीन दिन दूध देने की घोषणा की थी। इसके बाद माध्यमिक एवं प्रारम्भिक शिक्षा विभाग से लाभार्थी छात्र-छात्राओं की नामजद कक्षा व आयु वार सूचियां भी तैयार करवाई गई। लेकिन, यह सूचनाएं पड़ी-पड़ी तीन माह से दूध की तरह जम गई। कुछ दिनों पूर्व राजस्थान कॉ-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की ओर से भी सूचनाएं संग्रहित करवाई गई थी।
इंफो-न्यूज
मिड डे मील: दूध वितरण योजना
एमडीएम के तहत चिन्हित स्कूल : २२१८
दूध के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग में चयनित विद्यार्थी : १ लाख 33 हजार 867
माध्यमिक शिक्षा विभाग में चयनित विद्यार्थी : ७८ हजार ४८१
एक सत्र में देना था दूध : 2३0 दिन
योजना लागू करना आसां नहीं
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि दूध का वितरण दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों तक सुनिश्चित करना बहुत जटिल कार्य है। दूध एक निश्चित समय के बाद फट जाता है और उसको संभालने में भी काफी दिक्कत होती है। स्कूल तक यदि दूध पैकेट्स के माध्यम से पहुंचाया जाए, तो रोजाना उपस्थिति के आंकड़े अलग होते हैं। ऐेसे में दुरुपयोग की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। वहीं, स्कूल प्रशासन को अपने स्तर पर दूध की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा जाए, तो दूध की गुणवत्ता बनी रहनी संभव नहीं है। वहीं, शिक्षकों के सामने नई मुसीबत आएगी।
अधिकारी ने कहा...
. मुख्यालय से लाभार्थियों की सूचियां तैयार करने के निर्देश मिले थे। यह तैयार कर भेज दी है। संभवतया आगामी सत्र से योजना मूर्तरूप ले सकती है।
- मणिलाल छगण, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक
Published on:
10 May 2018 11:58 pm
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