मानसिक रोगी महिला को वहां डॉक्टर्स और एक सामाजिक कार्यकर्ता ने गूगल की मदद से करीब पौने दो साल बाद उसके घर पहुंचा दिया।
जयपुर/डूंगरपुर। यह कहानी फिल्मी नहीं, हकीकत है। राजस्थान के डूंगरपुर जिले से भटकते हुए केरल पहुंची मानसिक रोगी महिला को वहां डॉक्टर्स और एक सामाजिक कार्यकर्ता ने गूगल की मदद से करीब पौने दो साल बाद उसके घर पहुंचा दिया। बाईपोलर डिसऑर्डर (मानसिक बीमारी) से पीडि़त डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थानांतर्गत पावड़ा बालदिया गांव की रमिलादेवी (32) पत्नी रणछोड़ खराड़ी अपने डेढ़ माह के बालक के साथ 22 माह पहले केरल की राजधानी तिरुवनंतपुर में भटक रही थी। तभी पुलिस की नजर रमिला पर पड़ी, लेकिन अपने बारे में कुछ भी नहीं बता पाने के बाद पुलिस की परेशानी बढ़ गई। पुलिस उनको कोर्ट ले गई। कोर्ट के आदेश पर रमिला देवी को मानसिक रोग चिकित्सालय और उनके पुत्र को अनाथालय में भेज दिया गया।
डीएनए टेस्ट से बच्चे का पता
तिरुवनंतपुरम के सरकारी अस्पताल में डाक्टरों ने पाया कि रामलीला को बाईपोलर डीसआर्डर है और उसकी स्मृति जा चुकी है। तिरुवनंतपुरम के सरकारी मानसिक रोग चिकित्सालय के डॉ. आरएस दिनेश ने बताया कि जब महिला की स्थिति थोड़ी ठीक हुई तो हमने उसके बेटे गोद में दिया, लेकिन वो उसे भी नहीं पहचान पा रही थी। डॉक्टर्स के एक बार संदेह हुआ कि जिस बच्चे को लेकर वह मिली थी, कहीं किसी और का बच्चा तो नहीं। हालंाकि डीएनए टेस्ट से यह साफ हो गया कि बच्चा उसी का है।
सामाजिक कार्यकर्ता उम्मीद बनकर आई
अक्टूबर 2016 आते-आते रमिला की स्थिति काफी हद तक सुधर गई, काफी पूछने पर उसने केवल बिछीवाड़ा का नाम लेती थी। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता के. रमिला उसके जीवन में उम्मीद बनकर आई। माया ने गूगल के जरिए बिछीवाड़ा को ढूंढ निकाला। इसी महीने 14 तारीख को बिछीवाड़ा पुलिस ने फोनकर माया को बताया कि महिला का पता मिल गया है। इसके बाद रणछोड़ रमिला से मिलने तिरुवनंतपुरम पहुंचा तो पति-पत्नी भावुक हो गए। शनिवार को वह पत्नी और बच्चे को लेकर गांव आ गया।