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देखे वीडियो : हजारों को रोशनी देने वाले राजस्थान के मूलचंद लोढ़ा को मिला पद्मश्री

लोढ़ा के जीवन की संघर्ष भरी कहानी पढ़े

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मुकेश हिंगड़

राजस्थान के इस शख्स ने इस उम्र में जो काम किया और उसके बारे में जो भी सुनता है तो यह जरूर कहेगा कि बहुत बड़ा काम किया है। 74 वर्ष की उम्र में भी सेवा को लेकर बहुत कुछ संजो रखा है और उसी को लेकर कदम आगे बढ़ाते जा रहे है। ये है राजस्थान के डूंगरपुर के मूलचंद लोढ़ा। लोढ़ा को गुरुवार को नई दिल्ली में पद्मश्री दिया गया। (लाेढ़ा के पद्मश्री लेते हुए वीडियो नीचे देखे)

राष्ट्रपति भवन में पदम् पुरस्कार सम्मान समारोह के दूसरे संस्करण में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राजस्थान की तीन हस्तियों को पद्मश्रीश्री से सम्मानित किया गया। इसमें सामाजिक कार्य के लिए डूंगरपुर के सामाजिक कार्यकर्ता मूलचंद लोढ़ा को पद्मश्री पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इसी कार्यक्रम में गजल गायकी और शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन को भी सम्मानित किया गया।

अब तक 17 हजार से अधिक के करवाए आंखों के ऑपरेशन
लोढ़ा ने सालों पहले अपना घर छोडकऱ डूंगरपुर को अपना सेवा का केन्द्र बना लिया। अभावों के बीच एक आदिवासी के झोंपड़े में पांच निराश्रित बच्चों के साथ छात्रावास शुरू कर सेवा का दीपक जलाया था जिसकी रोशनी से आज हजारों जिंदगियां रोशन हो चुकी हैं। लोढ़ा राजसमंद के आमेट से डूंगरपुर आ गए और अपने साथ केवल सेवा का भाव लेकर आए। सेवा के लिए पहले उन्होंने 1968 में संघ प्रचारक के रूप में काम शुरू किया और बाद में उनको पाली में प्रचारक बना दिया। उनको 1990 में सेवा भारती का प्रदेश संगठन मंत्री बनाया। डूंगरपुर की तस्वीर रह-रहकर उनके सामने आती थी और वे यहीं कुछ करना चाहते थे तो वापस वे डूंगरपुर आ गए और वागड़ को ही अपनी कर्मस्थली बनाकर सेवा करने की ठान ली।

लोढ़ा बताते है कि यहां आकर वागदरी गांव में जागरण जन सेवा मंडल की स्थापना की। जब लोगों के आंखों की रोशनी नहीं होने के मामले सामने आए तो मन विचलित हो उठा। रोशनी देने के लिए इस सेवा प्रकल्प को हाथ में लेते हुए नेत्र चिकित्सा शिविर लगाने शुरू किए। अब तक डूंगरपुर, बांसवाड़ा व डूंगरपुर से सटे उदयपुर के कुछ भाग में उन्होंने सवा लाख लोगों के आंखों की जांच कराई और करीब 17 हजार लोगों के ऑपरेशन करवाकर आंखों की रोशनी लौटाई।

लोढ़ा ने वागदरी में जो केन्द्र बना रखा है उसका नाम महाराणा प्रताप परिसर रखा। इसमें 2005 में स्कूल शुरू किया जो आज आठवीं तक संचालित होता है। विवेकानंद ध्यान केन्द्र बनाया और 2004 में आचार्य महाप्रज्ञ नेत्र चिकित्सालय की स्थापना की। लोढ़ा कहते हैं कि मारवाड़ का प्रेम व स्नेह की झलक भी वागड़ में दिखती है क्योंकि उनके सपने का जो सेवा केन्द्र वागदरी में है उसके निर्माण में श्रम व भामाशाह मारवाड़ वालों ने पूरा किया। जनता के बीच हर पल रहने वाले 74 वर्षीय लोढ़ा ने 2022 डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में देहदान की घोषणा कर रखी है।

वीडियो नीचे देखे....

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