डूंगरपुर
आमतौर पर बच्चे नानी-नानी, मामा व अन्य रिश्तेदारों के गांव स्कूल की छुट्टियां बिताने के लिए जाते है, लेकिन प्रदेश में जनजाति बाहुल्य डूंगरपुर जिले के एक गांव के बच्चे छुट्टियों की मौज-मस्ती के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई के लिए रिश्तेदारों के गांव जा रहे है। अपने गांव में स्कूल के अभाव में नजदीकी गांव की पाठशाला तक दौड़ लग रही है।
जी हां कुछ ऐसा ही मामला साबला क्षेत्र की ग्राम पंचायत माल के पटेलिया फला के बच्चों के साथ जुड़ा हुआ है। पटेलिया फला में 60 से 70 मकानों की बस्ती तो है, लेकिन एक भी सरकारी विद्यालय व आंगनवाड़ी केंद्र नहीं है। यहां पूर्व में प्राथमिक स्तर का स्कूल खोला भी गया था, लेकिन न्यून नामांकन के बाद बंद कर दिया।
यहां पढ़ने जा रहे बच्चे
प्राथमिक शिक्षा के लिए पटेलिया फला के कुछ बच्चे चार किलोमीटर दूर माल पंचायत के ही टेंबरवाड़ा स्कूल जा रहे है। गांव से स्कूल तक का सफर जोखिमभरा है। बीच में बरसाती नाला व मार्ग सही नहीं होने से 15 बच्चों को स्कूल भेजना ही अभिभावकों ने बंद कर दिया। फिलहाल गांव के चार से पांच बच्चे रोज टेंबरवाड़ा तक आवाजाही कर रहे है, वही कुछ बच्चे पूंजपुर, गोठमहुड़ी, साबला सहित अन्य गांवों में रिश्तेदारों के यहां रहकर अध्ययन कर रहे है । इसके अलावा माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए तीन किलोमीटर दूर माल गांव जाते है।
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प्रयास कर रहे, नहीं मिली सफलता
ग्रामीणों अभिभावकों में मादुलाल कहते है स्कूल लंबे समय से बंद है। जिससे समस्या आ रही है। लालजी भाई बताते है कि स्कूल के अभाव में जोखिमभरा सफर तय कर नजदीकी रिश्तेदारों के गांव बच्चे पढ़ने जा रहे है। गांव में स्कूल खुलने पर नामांकन भी तय नियमों के अनुसार हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि बन्द विद्यालय को पुनः शुरू कराने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ स्थानीय विधायक को भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक स्कूल की सौगात नहीं मिली है।
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इनका कहना है
यहां पूर्व में स्कूल संचालित था, लेकिन न्यून नामांकन के चलते इसे बंद किया गया। दोबारा स्कूल खोलने के लिए उच्चाधिकारियों का मार्गदर्शन व आदेश जरूरी है। इस संबंध में चर्चा करेंगे।
सुखदेव मीणा, सीबीईईओ साबला