
100 tribal farmers land Revenue record in government Enter
जिला कलक्टर राजेंद्र भट्ट और जिला प्रमुख माधवलाल वरहात ग्रामीणों से रूबरू हुए। ग्रामीणों की समस्या सुन समाधान का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि नेजपुर गांव में सभी कास्तकारों को पुजारी बनाकर खातेदारी भूमि से बेदखल कर दिया गया। इसे लेकर ग्रामीणों ने कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया। फैसला काश्तकारों के हित में आया। रेवेन्यू बोर्ड अजमेर से ने भी किसानों के हक में ही निर्णय लिया, लेकिन अब तक हक नहीं मिलने से काश्तकारों को सरकारी योजनाओं का लाभ और रेलवे की ओर से अवाप्त भूमि का मुआवजा भी नहीं मिल रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि पूरे गांव के काश्तकारों के पूर्वज कृषक होकर स्वयं की काश्त की भूमि पर कृषि कार्य कर रहे थे। उनका नाम भी रिकार्ड में दर्ज था। संवतï् २००८ में लक्ष्मण देवस्थान निधि ट्रस्ट की ओर से मंदिर की पूजा अर्चना को लेकर गांव का लगान राधाबिहारी मंदिर डूंगरपुर में जमा कराने का निर्णय किया था।
राज्य सरकार ने १३ दिसम्बर १९९१ को मंदिर खाते की भूमि से पुजारी का नाम हटाने के आदेश दिए लेकिन पटवारी ने १९९७ में काश्तकरों को पुजारी बता कर जमाबंदी में नोट लगा खाते से बेदखल कर दिया। पीडि़त किसानों ने भूप्रबंध अपील अधिकारी उदयपुर में वाद दायर किया जिसका निर्णय किसानों के पक्ष में हुआ। रेवेन्यु बोर्ड में अपील दायर की बोर्ड की डबल बैंच ने आरएए उदयपुर के फैसले को यथावत रखा। उपखण्ड अधिकारी ने विधिक राय ले कर तहसीलदार को निर्देश दिए। तहसीलदार ने फाइल तत्कालीन कलक्टर नीरज के पवन को भेजी।
उन्होंने भी विधिक राय लेकर राजस्व मण्डल अजमेर से मार्गदर्शन लिया। वह भी प्राप्त गया। बावजूद आज तक नामान्तरण नहीं खोले गए हैं।
Published on:
21 Jun 2018 05:13 pm
बड़ी खबरें
View Allडूंगरपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
