
मिनी दाल मिल से संवरेगी महिलाओं की तकदीर
भारतीय दलहन अनुसंधान ने विकसित की मशीन
डूंगरपुर शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित फलौज केवीके में दो गांव के ४० लोगों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें महिलाओं को प्राथमिकता दी गई। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान ने मिनी दलहन मशीन विकसित की है।
बिना पॉलिश वाली तैयार होगी दाल
मशीन का डेमो देने आए भारत हेवी मशीन कानपुर के डॉ. जे.एन. शर्मा कहते है कि यह मशीन महिलाओं की तकदीर बदलेगी और वे आर्थिक रूप से और मजबूत होगी। पॉलिश वाली दाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। यह मशीन बिना पॉलिश वाली दाल तैयार करेगी।
दाल बनाने में जरूरी है सावधानियां
मशीन के जरिए दाल कैसे बनाई जाएगी। इसमें क्या-क्या सावधानियां जरूरी हैं, प्रशिक्षण में इस पर फोकस रहेगा। अभी तक महिलाएं चना, अरहर, मसूर, मूंग व उड़द दाने के रूप में सीधे छोटे व्यापारियों के जरिए बेच देती है। अब ये इस मशीन के जरिए दालें बनाकर बेचेंगी।
इन्हें नि:शुल्क मिलेगी मशीन
केवीके के वैज्ञानिकों के अनुसार 20-20 सदस्यों के दो ग्रुप बना रखे हैं। ग्रुप के सदस्य डूंगरपुर के आसपुर ब्लॉक के देवला, गणेशपुर व टाटिया गांव के रहने वाले हैं। महिला सदस्यों की संख्या अधिक है। ग्रुप के सदस्य इस मशीन का दाल बनाने में नि:शुल्क उपयोग कर सकेंगे।
इनका कहना है...
हमने मशीन का डेमो कर दिया है। अब दलहनी फसल की प्रदर्शनी लगाएंगे। इसके साथ ही ग्रुप के सदस्यों को दाल बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये मशीन इन सदस्यों के लिए लघु उद्योग के रूप में साबित होगी। ग्रुप से अंडरटेकिंग ली जाएगी । प्रत्येक महीने सदस्यों से रिपोर्ट भी ली जाएगी।
-डॉ. सी.एम. बलाई, केवीके प्रमुख व वरिष्ठ वैज्ञानिक, डूंगरपुर
मुकेश हिंगड़ — डूंगरपुर
Published on:
29 Nov 2022 04:41 pm
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